गुुरुग्राम। नगर निगम के अधिकारियों पर निगमायुक्त के निर्देशों का भी अब कोई असर नहीं पड़ रहा है। 31 जुलाई को हुई निगम सदन की बैठक में निगमायुक्त ने अधिकारियों को पिछले 5 वर्ष के दौरान विकास कार्यों में हुए व्यय का ब्योरा पार्षदों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन सप्ताह भर से ज्यादा का समय बीत जाने के बावजूद धनराशि का ब्योरा नहीं मिल सका है।
वहीं निर्देश देने के बाद निगमायुक्त मुकेश कुमार ने भी अधिकारियों से इस बारे में कोई जानकारी प्राप्त नहीं की है। दरअसल विकास कार्यों के नाम पर गुरुग्राम नगर निगम में वित्तीय अनियमितताएं सामने आती रही हैं। पिछले दिनों भी पार्षदों के फर्जी हस्ताक्षर कर विकास कार्यों की धनराशि की निकासी का मामला सामने आया था। ऐसे में कई पार्षदों ने निगम की बैठक के दौरान निगमायुक्त के समक्ष ही विकास कार्यों में खर्च हुई धनराशि का ब्योरा मांगा था। सीमा, अश्वनी शर्मा समेत कई पार्षद तो ऐसे भी थे जिन्होंने बैठक के एजेंडे में अपना प्रश्न सूचीबद्ध कराते हुए निगम में हुए विकास कार्यों व खर्च समेत पूरी एटीआर की ही मांग की थी।
सदन की बैठक तक ही सीमित रह जाते हैं मुद्दे
मामले की निगमायुक्त ने भी अब तक समीक्षा नहीं की है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों की तरह ही यह मामला भी कही ठंडे बस्ते में न चला जाए। वहीं, पार्षद भी निगम के सदन की बैठक में उठाए गए मुद्दों के क्रियान्वयन की समीक्षा नहीं करते। नतीजा यह है कि सदन की बैठक में उठाए गए मुद्दे चर्चा तक ही सीमित रह जाते हैं और यहीं पर ही दम तोड़ देते हैं।
निगम प्रशासन की तरफ से अब तक विकास कार्यों में खर्च हुई धनराशि से संबंधित कोई ब्योरा हमें नहीं मिल सका है। निगमायुक्त के निर्देश के बाद भी अब तक क्यों नहीं मिला है, यह अधिकारी ही जानते होंगे।
- अश्वनी शर्मा, निगम पार्षद वार्ड-19