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गाजियाबाद के चंद्र मोहन गर्ग को मिली 25 वीं रैंक

Wed, 11 May 2016 01:27 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
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एजुकेश्‍ान - फोटो : अमर उजाला
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सिविल सर्विसेज के फाइनल परिणाम में गाजियाबाद से भी कई छात्रों ने परचम लहराया है। नेहरू नगर थर्ड के चंद्रमोहन गर्ग को 25 वीं रैंक मिली है। वहीं प्रताप विहार के विवेक चौहान को 300 वीं और चिरंजीव विहार के अंशुल कुमार ने 293 वीं रैंक हासिल की है।
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  नेहरू नगर थर्ड एफ  ब्लॉक निवासी चंद्रमोहन ने कहा कि  बाबा जयगुरुदेव और माता-पिता के आशीर्वाद से उसे यह सफलता मिली। उसने कहा कि यदि आपका लक्ष्य निर्धारित है और उसे हासिल करने केलिए आप मेहनत कर रहे हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।

पिछले वर्ष भी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की थी। तब 617 वीं रैंक मिली। पोस्टल एंड टेलीकॉम डिपार्टमेंट मिला। एमएमएच कॉलेज से रिटायर्ड अपने पिता प्रोफेसर डा. ओपी गर्ग से प्रेरणा लेकर फिर से तैयारी की और 25 वीं रैंक  हासिल की। 
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चंद्रमोहन ने कहा कि एमएसआईटी से बीटेक करने के बाद एक वर्ष तक प्राइवेट जॉब की। बाद में सब कुछ छोड़कर सिर्फ सिविल सर्विसेज की तैयारी सोशियोलॉजी से की और ये सफलता मिली। हाईस्कूल सेंट मैरी और इंटरमीडिएट एसबीडीपीएस दिल्ली से पास किया था।

- चिरंजीव विहार निवासी अंशुल कुमार ने सिविल सर्विसेज में 293 रैंक हासिल की है। अंशुल ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था। बीटेक (इंस्ट्रयमेंट) करने के बाद पब्लिक एडमिनिशट्रेशन से तैयारी की। आर्ट सब्जेक्ट लेने का फायदा होता है कि इससे जनरल नॉलेज की भी तैयारी हो जाती है।

इससे पहले 2015 में आईएफएस की परीक्षा भी उतीर्ण की पर उसे ज्वाइन नहीं किया। पिता शिवराम और जीजा भरत वर्मा ने हमेशा प्रेरणा दी कि समाज के लिए कुछ अच्छा करना है तो सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करो।

2012 में बीटेक करने के बाद तैयारी शुरू कर दी। कई बार मन भी हताश होने लगा, लेकिन अपने स्तर से प्रयास करता रहा। अंत में ये सफलता मिली है। परिजनों के साथ दोस्त बेहद खुश हैं।

- प्रताप विहार सेक्टर 10 निवासी विवेक चौहान ने जब सिविल सर्विसेज पास करने की ठानी तो अपनी टीचर की सरकारी नौकरी भी छोड़ दी। दिल्ली में एक सरकारी स्कूल में कार्यरत विवेक ने नौकरी छोड पहले ही प्रयास में 300 वीं रैंक हासिल की।

विवेक ने बताया कि घर में पढ़ाई का माहौल हमेशा से रहा है। पिता ओम प्रकाश चौहान भी दिल्ली में टीचर हैं। पत्नी पूजा रानी भी एमसीडी के स्कूल में टीचर है। जब सभी का सपोर्ट मिला तो मैनें भी ठान लिया कि सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करके ही रहूंगा। रणनीति बनाकर तैयारी की। जब कभी कुछ अंदेशा होता तो परिजनों से सलाह लेता। सभी के प्रयास से मुझे यह सफलता मिली।
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