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टिकट के दावेदारों की लंबी कतार

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घंटाघर। फाइल फोटो - फोटो : GHAZIABAD City
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टिकट के दावेदारों की लंबी कतार
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गाजियाबाद। चुनाव की तारीखों की घोषणा भले न हुई, लेकिन हर विधानसभा पर सभी राजनीतिक दलों के दावेदारों ने तैयारी शुरू कर दी है। रैली से लेकर क्षेत्र में जनसंपर्क शुरू कर दिया गया है। भाजपा के एक दावेदार ने तो विधानसभा क्षेत्र में कार्यालय भी खोल दिया। सपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन तो हो गया है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर निर्णय होना बाकी है। अंदरखाने तय हो चुके सीटों के बंटवारे के फार्मूले के आधार पर दोनों दलों के दावेदारों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। बसपा में भी हर सीट के लिए पांच से आठ दावेदारों ने आवेदन जमा करा दिए हैं। कांग्रेस ने भी सभी सीटों पर दावेदारों से आवेदन पत्र मांग लिए हैं। सबसे ज्यादा आवेदन मुरादनगर विधानसभा सीट पर पहुंचे हैं। हालांकि अभी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की गई है। आचार संहिता लागू होने के बाद दावेदारों के नामों पर अंतिम मुहर लगेगी।
भाजपा : दावेदार टिकट पाने को लगा रहे जोर
जिले की पांच विधानसभा सीटों पर मौजूदा विधायकों के साथ कई अन्य दावेदार भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। गाजियाबाद सीट से स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग के अलावा वैश्य समाज के दो नेता मयंक गोयल और पवन गोयल का नाम टिकट के दावेदारों में हैं। साहिबाबाद सीट से विधायक सुनील शर्मा के अलावा पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। शनिवार को अजय शर्मा ने साहिबाबाद में अपना कार्यालय भी खोल लिया है। मुरादनगर सीट पर विधायक अजीत पाल त्यागी के अलावा पूर्व में चुनाव लड़ चुके ब्रजपाल तेवतिया, पूर्व जिलाध्यक्ष बसंत त्यागी, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी के बेटे अमरीश त्यागी भी प्रबल दावेदार हैं। लोनी सीट से विधायक नंदकिशोर गुर्जर, पूर्व चेयरमैन डॉ. विनोद बंसल और योगेंद्र मावी, पूर्व विधायक प्रशांत चौधरी दावेदारी कर रहे हैं। मोदीनगर सीट से विधायक डॉ. मंजू सिवाच के अलावा कई अन्य नेता टिकट मांग रहे हैं। पार्टी के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा का कहना है कि जनता की राय जानने को केंद्र व प्रदेश संगठन सर्वे टिकट का आधार बनेगा।
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सपा में पांच विधानसभा पर 55 आवेदन
समाजवादी पार्टी में पांचों विधानसभा सीट में से एक-एक सीट पर लगभग नौ आवेदन हैं। सपा की ओर से 55 दावेदारों ने अपना बायोडाटा हाईकमान को भेजा है। इनमें मुरादनगर सीट पर सबसे अधिक आवेदन शहर सीट पर हुए हैं। यहां से 20 दावेदार टिकट के लिए लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं। इसके बाद मुरादनगर सीट पर 15 आवेदन हाईकमान को भेजे गए है। पार्टी नेताआें से मिली जानकारी के अनुसार मोदीनगर और लोनी सीट पर छह-छह आवेदन और साहिबाबाद से आठ आवेदन लखनऊ भेजे गए हैं।
कांग्रेस व रालोद में भी दावेदारों की लंबी कतार
कांग्रेस में हर विधानसभा सीट पर टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। कांग्रेस में सबसे ज्यादा दावेदार मुरादनगर सीट के लिए हैं। यहां खुद जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इस विधानसभा सीट पर करीब 20 हजार यादव वोटर हैं। लोनी में चार, साहिबाबाद में पांच, गाजियाबाद विधानसभा सीट पर 8 और मोदीनगर सीट पर 5 दावेदार हैं। गाजियाबाद विधानसभा सीट पर दिवंगत पूर्व सांसद सुरेंद्र प्रकाश गोयल के बेटे सुशांत गोयल भी दावेदारी कर रहे हैं।
वहीं रालोद में भी टिकट के दावेदार तैयारी कर रहे हैं। सपा-रालोद गठबंधन में रालोद के खाते में लोनी, मुरादनगर और मोदीनगर विधानसभा सीट रह सकती है। रालोद की सबसे प्रबल दावेदारी मुरादनगर पर है। इस सीट पर करीब 80 हजार जाट वोटर हैं। ऐसे में यह सीट रालोद के खाते में जा सकती है। जाट बिरादरी के कई दावेदारों ने यहां तैयारी शुरू कर दी है। मोदीनगर में पूर्व विधायक सुदेश शर्मा की प्रबल दावेदारी है।
बसपा में 5 सीटों पर 20 दावेदार
बहुजन समाज पार्टी में भी टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। हर सीट पर 3 से 4 दावेदार बायोडाटा हाईकमान के पास लखनऊ भेज चुके हैं। चुनावी समीकरण को साधकर कई दावेदारों ने क्षेत्र में तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि अभी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। बसपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र जाटव का कहना है कि दावेदारों ने बायोडाटा जमा किए हैं, लेकिन पार्टी हाईकमान ही इस पर निर्णय लेगा। अभी किसी को टिकट के लिए हरी झंडी नहीं दी गई है।
शहर सीट पर साइकिल छोड़कर सब चले
गाजियाबाद। विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे राजनीतिक दल हर सीट पर समीकरणों का आकलन कर रहे हैं। शहर सीट पर यूं तो भाजपा का दावा मजबूत रहता है, लेकिन इस सीट पर समीकरण बदलते भी रहे हैं। 1951 से 2017 तक इस सीट का मिजाज बदलता रहा। वैश्य बहुल मानी जाने वाली शहर सीट पर कभी कांग्रेेस तो कभी भाजपा के खाते में ज्यादा रही है, लेकिन जनता पार्टी, बसपा और आरपीआई के विधायक भी यहां जीतकर विधानसभा तक पहुंचे हैं।
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देश की आजादी के बाद 1951 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तो गाजियाबाद नॉर्थ ईस्ट, गाजियाबाद नॉर्थ वेस्ट और गाजियाबाद साउथ तीनों सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। नॉर्थ वेस्ट (अब गाजियाबाद विधानसभा सीट) पर सबसे पहले तेजा सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। वह लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इसके बाद आरपीआई से प्यारेलाल शर्मा ने इस विधानसभा सीट पर जीत हासिल की। बसपा ने सिर्फ एक बार 2012 में इस सीट पर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी इस सीट पर कभी अपना खाता न खोल पाई। 72 साल में इस सीट पर सबसे ज्यादा दबदबा कांग्रेस और भाजपा का ही रहा है। भाजपा के बालेश्वर त्यागी लगातार तीन बार इस सीट पर विधायक रहे और अब 2017 में फिर इस सीट पर भाजपा विजयी रही। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने अपनी जीत को बरकरार रखने की चुनौती होगी तो वही विपक्ष के लिए एक बार फिर भाजपा से इस सीट को हथियाना इससे भी बड़ी चुनौती रहेगी।
ऐसे बदलते रहे गाजियाबाद के विधायक
वर्ष विधायक बने पार्टी वोट मिले दूसरे नंबर पर रहे वोट मिले
1951 तेजा सिंह कांग्रेस 19558 शंकर लाल 7121
1957 तेजा सिंह कांग्रेस 17505 पी.चंद्रा 9614
1962 तेजा सिंह कांग्रेस 17610 ईश्वर दयाल 15609
1967 पी.लाल आरपीआई 22341 आर सिंह 17060
1969 प्यारे लाल एसएसपी 19159 आफताब अली 12824
1974 प्यारे लाल कांग्रेस 23546 बलदेवराज शर्मा 10341
1977 राजेंद्र जेएनपी 28647 प्यारे लाल 28313
1980 सुरेंद्र मुन्नी कांग्रेस (यू) 18556 सतीश चंद शर्मा 17967
1985 केके शर्मा कांग्रेस 30108 दिनेश चंद गर्ग 28923
1989 सुरेंद्र मुन्नी कांग्रेस 54326 बालेश्वर त्यागी 37449
1991 बालेश्वर त्यागी भाजपा 54714 अनूप सिंह 32887
1993 बालेश्वर त्यागी भाजपा 91199 अनूप सिंह 46270
1996 बालेश्वर त्यागी भाजपा 110990 जितेंद्र 42975
2002 सुरेंद्र प्रकाश गोयल कांग्रेस 64760 बालेश्वर त्यागी 60234
2007 सुनील शर्मा भाजपा 88489 सुरेश बंसल 62834
2012 सुरेश बंसल बसपा 64344 अतुल गर्ग 52253
2017 अतुल गर्ग भाजपा 124024 सुरेश बंसल 53540
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