2014 के चुनाव के दौरान मोदी लहर में वह चांदनी चौक से तीन लाख से अधिक वोट पाकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री डा. हर्षवर्धन से एक लाख वोटों से हार गए थे। फिर भी वह कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से सवा लाख वोटों से आगे रहे।
पार्टी नेतृत्व के साथ आशुतोष के मतभेद पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान उभरे, जब केजरीवाल ने सुशील गुप्ता जैसे उद्योगपति को टिकट दिया था। साथ ही वह आशुतोष और संजय सिंह को राज्यसभा भेजना चाहते थे।
लेकिन आशुतोष ने स्पष्ट कहा कि उनका जमीर उन्हें सुशील गुप्ता के साथ राज्यसभा जाने की इजाजत नहीं देता है। चाहें उन्हें टिकट मिले या न मिले, सुशील गुप्ता को राज्यसभा नहीं भेजा जाना चाहिए।
तब केजरीवाल ने उनकी जगह चार्टर्ड अकाउंटेंट एनडी गुप्ता का नामांकन करा दिया। हालांकि एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता दोनों ही आप के सदस्य नहीं थे। इसके बाद से ही आशुतोष राजनीति में निष्क्रिय हो गए थे।
किरण बेदी, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, मयंक गांधी, शाजिया इल्मी और कुमार विश्वास के साथ आशुतोष भी आप के संस्थापक सदस्यों में से थे। कुमार के अलावा इन सभी ने एक-एक कर आप छोड़ दी है।
कुमार विश्वास फिलहाल पार्टी में हैं, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय हैं। अपने लेखों और कविताओं में जरूर वह आप के नेतृत्व पर तंज कसते रहते हैं।