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Faridabad News: छात्रों के लिए व्यापार, नवाचार और उद्यमिता पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की होगी शुरुआत

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संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। जिले की मानव रचना यूनिवर्सिटी में यूरोपीय संघ के सहयोग से संचालित इरासमस प्लस कार्यक्रम के तहत व्यापार, नवाचार और उद्यमिता पर आधारित 10 मॉड्यूल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसमें जिले का मानव रचना विश्वविद्यालय, नेपाल और श्रीलंका का एक-एक विश्वविद्यालय शामिल है।

यह जानकारी बुधवार को मानव रचना अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान एवं अध्ययन संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम के दौरान दी गई। कार्यक्रम में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे और सत्यभामा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी चेन्नई भी सहयोगी संस्थान के रूप में शामिल रहे।
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कार्यक्रम में दक्षिण एशिया और यूरोप के कई अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद, शोधकर्ता और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान क्षेत्र में डिजिटल रिसर्च क्षमताओं को मजबूत करने, इनोवेशन सपोर्ट सिस्टम विकसित करने और विश्वविद्यालयों के माध्यम से एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम तैयार करना समय की जरूरत है, ताकि नवाचार आधारित आर्थिक विकास को गति मिल सके।

एनएसआईएस प्रोजेक्ट के लीड और इरास्मस प्लस के समन्वयक डॉ. पैड्रेग किर्बी ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सूचना, अनुसंधान और डिजिटल कौशल को विकसित करना है। इसके तहत 10 मॉड्यूल का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, जिसमें डिजिटल साक्षरता, डेटा स्किल्स, बौद्धिक संपदा अधिकार, ऑनलाइन शोध प्रकाशन, शैक्षणिक लेखन और व्यापार प्रबंधन जैसे विषय शामिल होंगे। यह कोर्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्वविद्यालयों को उपलब्ध कराया जाएगा।

किर्बी ने कहा कि आज के दौर में डिजिटल परिवर्तन और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के कारण रिसर्च और डिजिटल स्किल्स इनोवेशन के प्रमुख आधार बन चुके हैं। यह परियोजना दक्षिण एशिया के विश्वविद्यालयों के बीच अकादमिक सहयोग को मजबूत करेगी। कार्यक्रम में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
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इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. नरेश ग्रोवर ने कहा कि डिजिटल बदलाव केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालयों में सीखने, शोध और सहयोग के तरीके को भी बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से क्षेत्र में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ेगा तथा नवाचार आधारित उद्यमिता और तकनीकी विकास को मजबूती मिलेगी।
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