नागरिक सेवाओं में देरी की तो कार्रवाई को तैयार रहे अधिकारी
- हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला में बोले मुख्य आयुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा है कि सभी विभागों के अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सरकार की ओर से लोगों को दी जा रही सुविधाएं समयबद्ध ढंग से मिले। किसी भी स्थिति में देरी हुई तो कार्रवाई के लिए अधिकारी तैयार रहें। फिलहाल सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में 546 सेवाएं हैं और जल्द ही 10 अन्य सेवाओं को भी दायरे में लाया जाएगा। वह सोमवार को सेक्टर-12 स्थित एचएसवीपी कन्वेंशन सेंटर में जिला स्तरीय कार्यशाला में अधिकारियों समेत अन्य को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य आयुक्त ने बताया कि जल्द ही आयुष्मान भारत, प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र में संशोधन, सीवरेज कनेक्शन, खाद व फसल विविधीकरण प्रोत्साहन योजनाओं, मनरेगा, स्वामित्व योजना के तहत किए गए पंजीकरण में शुद्धीकरण, छात्रों को प्रदान की जाने वाली मार्कशीट, डिग्री व स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, महिलाओं व बच्चों के टीकाकरण जैसी विभिन्न योजनाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल किया जाएगा। उन्होंने विभागाध्यक्षों के लिए सख्त हिदायत के साथ कुछ लक्ष्य भी निर्धारित किए। गुप्ता ने निर्देश दिए कि सेवाओं के निपटान के मामले में विभागों का स्कोर 10 में से कम से कम 9.9 होना चाहिए। नागरिकों से सेवाओं के संबंध में ली जाने वाली प्रतिक्रिया के मामले में भी 5 में से कम से कम 4 अंक होने चाहिए।
रिजेक्शन रेट को भी करें कम
मुख्य आयुक्त ने कहा कि 31 अक्तूबर तक सभी विभाग वर्ष 2020 तक की लंबित सेवाओं के मामलों का निपटान करना सुनिश्चित करें। यह भी हिदायत दी कि विभाग विभिन्न सेवाओं के मामले में रिजेक्शन रेट को भी कम करें। किसी भी अधिकारी की लापरवाही पाई गई तो समन कर मुख्यालय बुलाया जाएगा। ऐसे मामलों में 20 हजार रुपये तक की पेनाल्टी लगाई जाएगी। यदि किसी एक अधिकारी पर तीन बार इस प्रकार की पेनाल्टी लग गई तो उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। अभी तक लापरवाही के मामलों में आयोग ने 250 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
लंबित आवेदनों पर कड़ी चेतावनी
मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा कि फिलहाल 31 विभागों की 546 सेवाओं को आरटीएस में सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से 277 सेवाएं अंत्योदय सरल, 184 ऑनलाइन पोर्टल तथा 85 ऑफलाइन सेवाएं हैं। ऑफलाइन सेवाओं को भी जल्द ही ऑनलाइन कर सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा। बैठक में ऐसे अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी, जिनके पास लंबित आवेदनों की संख्या अधिक है। विशेष रूप से नगर निगम फरीदाबाद, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, वेलफेयर ऑफ एससी-बीसी, एचएसवीपी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास व श्रम विभाग के अधिकारियों को सुधार के लिए निर्देश दिए।
कॉल सेंटर के माध्यम से शिकायत होंगी दूर
मुख्य आयुक्त ने नागरिकों से भी सेवाओं के संबंध में प्रतिक्रिया ली। कहा कि सेवाओं में जानबूझकर लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में ऑटो अपील सिस्टम विकसित किया गया है। इसके अतिरिक्त जल्द ही एक कॉल सेंटर की स्थापना भी की जाएगी, जिसमें देरी के मामलों में आवेदक फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। उन्होंने कहा कि नागरिक आरटीएससी-एचआरवाई डॉट जीओवी डॉटआईएन पर भी अपनी शिकायत आयोग को कर सकते हैं।
दैनिक आधार पर कार्य लंबित नहीं होना चाहिए
फरीदाबाद मंडल के आयुक्त संजय जून ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने काम को जुनून के साथ करें। दैनिक आधार पर कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उपायुक्त जितेंद्र यादव ने सेवा का अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी दी। डिप्टी मेयर मनमोहन गर्ग ने कहा कि ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान है। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा, स्मार्ट सिटी की सीईओ डॉ. गरिमा मित्तल, एचएसवीपी की प्रशासक मोनिका गुप्ता, सहायक आयुक्त अभिषेक मीणा, एडीसी सतबीर सिंह मान, एसडीएम फरीदाबाद परमजीत सिंह चहल, सीटीएम पुलकित मल्होत्रा सहित अन्य उपस्थित थे।