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मदर्स डे: बच्चों के इंतजार में पथरा रही मां की आंखे.. नहीं आए लाल

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- अपने जीवन में व्यस्त बच्चों को नजर नहीं आ रहे मां के आंसू, छोड़ गए वृद्धाश्रम
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निभा रजक
फरीदाबाद। मां...एक ऐसा शब्द जो अपने आप में भावनाओं का समंदर है। कभी दुलार तो कभी डांट डपटकर बच्चों को सही राह दिखाने वाली मां की आंखें आज बच्चों की याद में पथरा रही हैं। एक मिनट भी मां के बिना नहीं रहने वाले बच्चे आज उन्हें सड़क पर छोड़कर चले गए। ऐसे में करीब 13 माएं बेटों के इंतजार में एनआईटी-2 स्थित ताऊ देवीलाल आश्रम में रह रहीं हैं। आश्रम के संचालक किशन लाल बजाज बुजुर्गों की न केवल देखभाल कर रहे हैं बल्कि उनका इलाज भी करा रहे हैं।

गृहस्थी में व्यस्त हैं बेटियां, साथ नहीं रखने देते दामाद
मूलरूप से कलकत्ता रहने वाली 87 वर्षीय शोभा ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा है। उनके पति कलकत्ता में दूध मिल में काम करते थे, पति की मौत के बाद शोभा फरीदाबाद आ गईं। यहां एक वर्कशॉप में नौकरी करने लगीं। शोभा की दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। एक नागपुर और एक फरीदाबाद में रहती है। मानसिक रूप से बीमार बेटा स्वपन भी मां के साथ आश्रम में रहता है। शोभा एक गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। उनका कहना है कि बेटियां अपने साथ नहीं रखती हैं। उनके साथ रहने से दामाद लड़ाई-झगड़ा और नाराजगी जाहिर करते हैं। परिवार के बारे में बात करते समय बीच-बीच में शोभा कई बार भावुक हो गईं।
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सड़क पर छोड़ गया था भतीजा, आश्रम में मिली जगह
करीब 50 वर्षीय नर्मदा ने बताया कि छोटी उम्र में शादी हो गई थी। गोरखपुर में उनके पति राम सिंह सब्जी विक्रेता थे, बीमारी कारण उनकी मौत हो गई। नर्मदा की कोई संतान नहीं है। पति की मौत के बाद चाचा चौक पर माता-पिता के साथ रहने लगीं। माता-पिता के बाद भाई और भाभी ने परेशान करना शुरू कर दिया। आए दिन घर में उनको लेकर झगड़े होने लगे। एक दिन उनका भतीजा सड़क पर सामान सहित नर्मदा को छोड़कर चला गया। नर्मदा ने बताया कि वह निसंतान हैं, लेकिन जिस भतीजे को अपने बेटे की तरह लाड़-प्यार से पाल पोसकर बड़ा किया आज उसने ही सड़क पर ठोकर खाने के लिए छोड़ दिया। रक्षा करने की कसम खाने वाले भाई के मुंह से भी एक शब्द नहीं निकला।
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आज बच्चे नहीं कर पा रहे माता-पिता की देखभाल
आजकल बच्चों के लिए माता-पिता भारी हो गए हैं। नए समाज के अधिकांश बच्चों ने माता-पिता को आश्रम का रास्ता दिखा दिया है। यह चिंतनीय है। आश्रम में ऐसे बुजुर्गों को सम्मान के साथ रखा जाता है। आश्रम में करीब 50 बुजुर्ग हैं, इनमें 13 महिलाएं हैं।
- किशनलाल बजाज, संचालक, एनआईटी-2 ताऊ देवीलाल
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