अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। दिल्ली, हरियाणा और यूपी को जोड़ने वाली आगरा नहर के साथ बनी सड़क को चार लेन बनाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। इसकी वजह हरियाणा सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को फंड न दिया जाना बताया गया है। छह साल पहले मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस सड़क को 219 करोड़ रुपये की लागत से चार बनाने की घोषणा की थी। सड़क पर सुबह-शाम भारी ट्रैफिक होने के कारण लोगों को घंटों जाम से जूझना पड़ता है। जिससे लोग परेशान रहते हैं। फरीदाबाद में आईएमटी से कालिंदी कुंज तक आगरा नहर के साथ सिंगल 30 किलोमीटर लंबी रोड बनी हुई है। इस सड़क का 10 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली और 20 किलोमीटर फरीदाबाद में आता है। छह साल पहले मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सड़क को चार लेन करने की घोषणा की थी। नहर के साथ की जमीन पर यूपी सिंचाई विभाग का अधिकार है, इसलिए सड़क का निर्माण उन्हें ही करना है। फरीदाबाद की सीमा में सड़क की लागत का भुगतान हरियाणा सरकार को करना है। यूपी सिंचाई विभाग ने सड़क के लिए लगभग 219 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें से लगभग 58 करोड़ रुपये दिल्ली और लगभग 161 करोड़ रुपये फरीदाबाद की सीमा में रोड के निर्माण पर खर्च होने हैं। पहले तय हुआ था कि एचएसवीपी, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एचएसआईआईडीसी मिलकर काम करेंगे। उसके बाद पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क को बनाने का प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पास भेज दिया था। अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण के कारण सड़क पर रहता है जाम
जिले के मुख्यालय से दिल्ली की दूरी 30 किलोमीटर है। बाईपास रोड पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण चल रहा है। इस कारण पुलिस की ओर से इसे यातायात के लिए बंद कर रखा है। दिल्ली जाने का दूसरा रास्ता सूरजकुंड खतरनाक माना जाता है। यहां लूटपाट के अलावा काफी दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। इस कारण लोग दिल्ली और नोएडा जाने के लिए आगरा नहर के साथ बनी सड़क का फरीदाबाद कालिंदीकुंज रोड का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन, सुबह-शाम इस सड़क पर भारी भीड़ होती है। 15 मिनट का सफर तय करने में लोगों को एक घंटा लग जाता है। इस कारण सरकार ने नहर के साथ यूपी सिंचाई विभाग की जमीन पर चार लेन रोड बनाने की योजना तैयार की थी, जो सिरे नहीं चढ़ सकी।
पैसों का भुगतान नहीं होने के कारण रुका काम
फरीदाबाद स्थित इंडस्ट्रियल मॉडल टाउन (आईएमटी) से कालिंदीकुंज तक आगरा नहर के साथ दो लेन की सड़क बनी हुई है। इसकी लंबाई 30 किलोमीटर है, जिसमें 10 किलोमीटर दिल्ली और 20 किलोमीटर हरियाणा के अंदर आता है। हरियाणा की सीमा में मार्ग का निर्माण हरियाणा सरकार को कराना है। नहर के साथ जिस जमीन पर मार्ग बनाया जाना है, वह जमीन उत्तर प्रदेश (यूपी) सिंचाई विभाग की है। आगरा नहर पर भी नियंत्रण यूपी के सिंचाई विभाग का है। यूपी का सिंचाई विभाग अपनी जमीन में किसी को भी कोई निर्माण कार्य नहीं करने देता है। ऐसे में यूपी सिंचाई विभाग ही सड़क का निर्माण करेगा। पैसे का भुगतान प्रदेश सरकार द्वारा किया जाना है।
वर्जन
आगरा नहर के साथ बनी ये सड़क यूपी सिंचाई के अंतर्गत आती है। सड़क को चार लेन बनाने के लिए यूपी सिंचाई विभाग ने हरियाणा सरकार से पैसों की मांग की है। भुगतान नहीं होने के कारण योजना सिरे नहीं चढ़ी है। - अरविंद भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग