दिल्ली के स्कूलों में चालू सत्र से शैक्षणिक, सह शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ माइंडसेट करिकुलम, देशभक्ति व हैप्पीनेस पाठ्यक्रमों का भी मूल्यांकन किया जाएगा। माइंडसेट पाठ्यक्रम में किसी कंटेंट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा बल्कि इसके माध्यम से बच्चे ने क्या सीखा और व्यवहार में क्या परिवर्तन आया, इसका आकलन होगा।
सरकार ने इसके लिए पहले व दूसरे टर्म के लिए 50-50 अंकों की वेटेज तय की है। छात्र को अगली कक्षा में प्रमोट करनेे के लिए अंकों की इस वेटेज की गणना नहीं की जाएगी। दिल्ली सरकार ने तीसरी से नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा के बच्चों की परीक्षा व मूल्यांकन की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। यह गाइडलाइंस सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त व मान्यता प्राप्त अनएडेड स्कूलों में लागू होंगी। सरकार नेे बच्चों में आंत्रप्रन्योरशिप माइंडसेट को बढ़ावा देने, देशभक्ति की भावना विकसित करने और हैप्पीनेस को उनके जीवन का हिस्सा बनाने के लिए यह नई मूल्यांकन गाइडलाइंस तैयार की हैं। तीसरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों का मूल्यांकन हैप्पीनेस और देशभक्ति पाठ्यक्रम के लिए किया जाएगा, जबकि नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों का मूल्यांकन देशभक्ति और आंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट पाठ्यक्रम के लिए किया जाएगा। ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए असेसमेंट का एक अलग मानदंड होगा। इसमें बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम में उनकी भागीदारी भी होगी।
मूल्यांकन का आधार बच्चों की समझ के आधार पर: मनीष सिसोदिया
नई गाइडलाइंस पर शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इनमें बच्चों का मूल्यांकन पाठ्यक्रम की सामग्री के आधार पर नहीं बल्कि विभिन्न वास्तविक जीवन परिस्थितियों में उनकी समझ को लागू करने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। सिसोदिया ने कहा कि प्रश्न पत्र इस तरह से सेट किए जाएंगे जहां छात्रों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में इन पाठ्यक्रमों से सीखे अनुभवों का प्रयोग कर उत्तर देना है। बच्चों को इन पर अनूठे प्रोजेक्ट कार्य भी करने होंगे।
मुख्य बातें
-शैक्षणिक सत्र 2022.23 में मिड-टर्म परीक्षाएं सितंबर-अक्तूबर में और वार्षिक परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की जाएगी।
-वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र सीबीएसई और शिक्षा निदेशालय द्वारा तय पाठ्यक्रम से तैयार किए जाएंगे।
-मिड टर्म, प्री-बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं में प्रश्न पत्र इस तरह से सेट किए जाएंगे कि आवश्यकता के अनुसार समझ दक्षता और अन्य कौशल का आकलन किया जा सके। बड़ी कक्षाओं में प्रश्नों का पैटर्न बोर्ड परीक्षाओं में निर्धारित प्रश्नों के समान ही होगा।