रीढ़ में होने वाली टीबी से युवा भी बड़ी संख्या में पीड़ित हो रहे हैं। इस बीमारी का शिकार हर दूसरा मरीज युवा है। हालांकि, इनमें सिर्फ 10 फीसदी मरीजों को सर्जरी कराने की जरूरत पड़ी है। एम्स के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। एम्स ने रीढ़ की टीबी के 1652 मरीजों पर यह अध्ययन किया है। इस अध्ययन में 777 महिलाएं और 875 पुरुष शामिल हुए।
अध्ययन ये पाया गया कि रीढ़ की टीबी के सबसे ज्यादा मरीज 21 से 30 साल के बीच की उम्र के थे। इन मरीजों की संख्या 33 फीसदी थी। इसके बाद 31 से 40 साल के 17 फीसदी थे। वहीं 15.2 प्रतिशत मरीजों की उम्र 11 से 20 साल के बीच की थी। अधिकतर मरीज ऐसे थे, जिन्हें सिर्फ कमर या गर्दन में दर्द के अलावा कोई अन्य लक्षण नहीं था।
स्टडी में पाया गया कि रीढ़ में टीबी का संक्रमण होने के बाद बीमारी की जांच करीब साढ़े चार महीने बाद हुई. इस वजह से बीमारी की पहचान देर से हुई। शोध में यह भी पता चला है कि रीढ़ की टीबी से 19 फीसदी मरीजों को न्यूरो की समस्या भी हुई है। इस टीबी से ग्रस्ति एक प्रतिशत मरीज एचआईवी संक्रमित थे।