दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने पीतमपुरा इलाके के एक पीजी में बंधुआ मजदूरी की शिकार झारखंड के रांची निवासी 20 वर्षीय युवती को मुक्त कराया है। एनजीओ एचआरएलएन ने इसके संबंध में सूचना दी थी। आयोग की टीम ने पुलिस और श्रम विभाग के साथ मिलकर उस स्थान पर पहुंची, जहां लड़की को बंद करके रखा गया था। युवती बेहद डरी हुई मिली। उसे बीते तीन महीने से इस घर में बंधक बनाकर रखा हुआ था।
पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 370, 342, 374, 34 के तहत एफआईआर दर्ज की है। हालांकि अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। फिलहाल युवती को शेल्टर होम में रखा गया है। अब डीसीडब्ल्यू उसे वेतन दिलाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर रहा है। युवती ने बताया कि वह एक साल से इस घर में है।
सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक उसे अकेले ही घर में चल रहे पीजी में रहने वाले लोगों के लिए सब काम करना पड़ता था। इसके लिए उसे कोई पैसा नहीं मिलता था। घर के मालिक उसके साथ अक्सर मारपीट करते और उसे बाहर भी नहीं जाने देते थे। युवती ने बताया कि मार्कस नाम का व्यक्ति उसे एक साल पहले झारखंड से दिल्ली लाया था। उसने उसे शकूरपुर में एक आदमी के पास छोड़ दिया।
वह आदमी उसे पीतमपुरा के इस घर में लेकर गया, जहां उससे बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। उसके पास 3000 रुपये और फोन था, जिसे छीन लिया गया। उसको कभी अपने घरवालों से बात नहीं करने दी जाती थी। डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार को प्लेसमेंट एजेंसी को नियंत्रित करने के लिए तुरंत मजबूत क़ानून बनाना चाहिए। मामले के दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।