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दिल्ली-एनसीआर को झेलना पड़ सकता है बिजली संकट

Mon, 07 Dec 2015 07:43 PM IST
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
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एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनटीपीसी की दो पावर जेनरेशन यूनिटों को बंद करने केआदेश दिए हैं। बदरपुर सहित इन दोनों यूनिटों में कोयले से बिजली उत्पादन किया जा रहा था।
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ट्रिब्युनल के आदेश से दोनों उत्पादन इकाइयों के एक जनवरी से बंद होने का खतरा बढ़ गया है। इससे दिल्ली-एनसीआर को गर्मियों में बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। दोनों यूनिटों से 1200 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है।

यह है मामला
दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण निर्धारित मानकों से कई गुना ज्यादा हो गया है। इससे लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा है। कोर्ट ने हानिकारक गैसों के चलते दिल्ली-एनसीआर को गैस चैंबर की संज्ञा दी है।
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हानिकारक गैसों और एसपीएम (सालिड पार्टिकल मैटर) के कारण लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं। बच्चों को सांस, टीबी और कैंसर जैसे रोग हो रहे हैं।

यह है कारण
दिल्ली-एनसीआर में धूल, धुआं और हानिकारक गैसों के कारण वातावरण में एक खतरनाक परत बन गई है। गर्मियों में यह परत थोड़ी ऊंचाई पर होती है।

इससे सांस लेने में इनका असर थोड़ा कम हो जाता है। सर्दियों में प्रदूषण का मानक बढ़ जाता है। साल दर साल बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने कोयले से बिजली उत्पादन करने वाली इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए हैं।

इन पर पड़ेगा प्रभाव
दिल्ली के बदरपुर सहित एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन) की दो बिजली उत्पादन इकाइयों में कोयले से बिजली का उत्पादन हो रहा है।

इनको बंद करने के आदेश दिए गए हैं, जबकि एक अन्य के खिलाफ सुनवाई चल रही है। एनजीटी का आदेश फिलहाल कोयले से बिजली बनाने वाले संयंत्रों पर हैं।

बिजली उत्पादन इकाइयों के बंद होने से दिल्ली और यूपी में बड़ा बिजली संकट हो जाएगा। उक्त दोनों यूनिटों की बिजली का प्रयोग यूपी-दिल्ली में हो रहा है। एनजीटी के आदेश केबाद 1200 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो जाएगा।
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झेलनी होगी परेशानी
पावर कारपोरेशन अफसर डीसी अग्रवाल के अनुसार यह बड़ी सप्लाई है। इससे बड़ी संख्या में उद्योग और घरेलू प्रयोग का पूर्ति की जा सकती है।

फिलहाल गाजियाबाद की समस्त जरूरत को पूरा करने जितनी बिजली की कमी होती जाएगी। इससे गर्मियों में बड़े बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।

कोयला यूनिटों को एक साथ गैस जेनरेशन यूनिटों में बदलना संभव नहीं है। ऐसे में एनजीटी से इसकेलिए समय देने की मांग की जाएगी।

यदि एनजीटी मानता है तो धीरे-धीरे बदलाव किया जाएगा। यदि नहीं मानता है तो फिर सरकार को देखना होगा कि बिजली जरूरत कैसे पूरी की जाएगी?
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