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मनी लॉन्ड्रिंग मामलाः दिल्ली हाई कोर्ट में गौतम थापर की याचिका खारिज, गिरफ्तारी को दी थी चुनौती

Thu, 30 Sep 2021 05:39 PM IST
अनुराग सक्सेना न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाई कोर्ट ने अवंता ग्रुप के प्रमोटर गौतम थापर को बड़ा झटका देते हुए उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। उन्हें 500 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था।
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ED अदालत से बाहर निकलते राणा कपूर - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अवंता ग्रुप के प्रमोटर गौतम थापर को बड़ा झटका देते हुए 500 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उन्हें गिरफ्तार किए जाने को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। थापर ने उन्हें हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके अनुसार वे 24 घंटे की तय सीमा के बाद ट्रायल कोर्ट में पेश हुए थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
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थापर ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
थापर ने ट्रायल कोर्ट के पांच अगस्त के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में थापर की गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली याचिका को बिना कारण सुने खारिज कर दिया था। जस्टिस योगेश खन्ना ने आदेश को रद्द करने का आदेश जारी किया था। ईडी ने थापर की याचिका का विरोध किया था। थापर के वकील ने इससे पहले अदालत में दलील दी थी कि मेमो में गिरफ्तारी का समय तीन अगस्त को शाम 7.55 बजे दिखाया गया था। हालांकि ईडी अधिकारियों द्वारा थापर के स्थानों पर छानबीन और सीज करने की कार्रवाई तीन अगस्त को सुबह 8.30 बजे की गई थी और उन्हें उसी समय गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा था कि चार अगस्त को थापर को पीएमएलए के विशेष जज के समक्ष नियत समय के बाद पेश किया गया था जो कि कानून के खिलाफ है और उन्हें ईडी की एक दिन की रिमांड पर भेज दिया गया था।

ईडी को 5 अगस्त को मिली थी 10 दिन की कस्टडी
थापर के वकील ने कहा कि थापर को पांच अगस्त को ईडी को 10 दिन की कस्टडी दी गई थी। गिरफ्तारी का समय वह होता है जब किसी व्यक्ति पर पाबंदी लगा दी जाती है, जो इस मामले में सुबह के 8.30 बजे हैं बल्कि वह समय नहीं जो गिरफ्तार करने वाले अधिकारियों ने दर्ज किया है। उन्हें कोर्ट में 24 घंटे के अंदर पेश नहीं किया गया। इसके अलावा, थापर ने ईडी द्वारा दर्ज इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) की एक प्रति भी मांगी थी, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था, जिनके अनुसार थापर मनी लॉन्ड्रिंग के दोषी हैं और गिरफ्तारी से पहले तैयार की गई एक चेक-लिस्ट मांगी थी। उनकी याचिका कोर्ट में लंबित है।
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ईडी बोल रहीः तीन अगस्त की रात किया गिरफ्तार
ईडी के अनुसार, उसने दिल्ली और मुंबई में थापर के और थापर के उद्योगों के खिलाफ छापे मारने के बाद उन्हें तीन अगस्त की रात गिरफ्तार किया था। ईडी ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि जांच में खुलासा हुआ कि ओएस्टर बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड (ओबीपीएल), झाबुआ पॉवर लिमिटेड (जेपीएल), झाबुआ पॉवर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (जेपीआईएल), अवंता पॉवर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल), अवस्ता रिएलिटी लिमिटेड (एआरएल) आदि के माध्यम से लगभग 500 करोड़ रुपये की लॉन्ड्रिंग की गई थी। ईडी के अनुसार, इन कंपनियों पर नियंत्रण और इनसे मिलने वाला फायदा सीधे या परोक्ष रूप से गौतम थापर को मिल रहा था।

ईडी ने कोर्ट में बताया, जांच में खुलासा हुआ कि इन कंपनियों ने धोखाधड़ी करने के लिए फर्जी एग्रीमेंट किए थे, जिससे यस बैंक और अन्य माध्यमों से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये निकाले जा सकें। ईडी ने आरोप लगाया कि ये राशि बाद में एनपीए घोषित कर दी गई, जिससे जनता के पैसे का इतना बड़ा नुकसान हुआ। ईडी थापर की कंपनी अवंता रिेएलिटी और यस बैंक के सह-संस्थापक राणा कपूर और उनकी पत्नी के बीच हुए एक कथित लेन-देन की जांच कर रही है। एजेंसी इन आरोपितों के खिलाफ पीएमएलए के एक मामले में भी जांच कर रही है।

सीबीआई द्वारा दर्ज मामले का संज्ञान लेकर ईडी ने दर्ज किया था मुकदमा
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एक मामले का संज्ञान लेने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने कहा था, सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में आरोप है कि यस बैंक लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राणा कपूर के नाम वास्तविक मार्केट कीमत से बहुत कम कीमत पर अवंता रिेएलिटी लिमिटेड की दिल्ली में प्राइम लोकेशन पर संपत्ति की गई थी। इसके बदले में उन्होंने यस बैंक लिमिटेड की तरफ से एआरएल का लोन पास कर दिया था और अवस्ता ग्रुप कंपनी को पहले से ही मिली छूट और रिआयतों को आगे बढ़ाया था और उनके लिए अतिरिक्त लोन पास कर दिया था।

ईडी ने बताया था कि इससे पहले सीबीआई ने पिछले साल राणा कपूर और उनकी पत्नी बिंदू के खिलाफ कथित रूप से दिल्ली में मार्केट कीमत से आधी कीमत पर एक बंगले के रूप में एक रिएलिटी फर्म से 307 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के और बदले में 1,900 करोड़ रुपये के बैंक लोन पास करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
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