दिल्ली में चार दिन के भीतर तीन नवजात सहित सात बच्चों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। यह खुलासा दिल्ली सरकार की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। इसके मुताबिक, नौ से 12 जनवरी के बीच राजधानी में 97 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। इनमें से 72 फीसदी मौतें उन लोगों की हुई हैं जिन्होंने संक्रमित होने से पहले टीका नहीं लिया था।
वहीं 24 फीसदी मौतें टीका लेने वालों की हुई हैं लेकिन इनमें से 70.37 फीसदी ने केवल एक ही खुराक ली थी। जबकि 29.62 फीसदी ने दोनों खुराक लेकर टीकाकरण खत्म कर लिया था। इनके अलावा 18 वर्ष से कम आयु में सात मौतें दर्ज की गई हैं जिनमें तीन नवजात भी शामिल हैं।
कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि इन बच्चों में ज्यादातर कोरोना संक्रमण से पहले ही बीमार थे। एक बच्चा जन्मजात हार्ट बीमारी से ग्रस्त था। जबकि एक बच्चे को फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी थी। उन्होंने बताया कि ओमिक्रॉन या कोरोना हल्का संक्रमण नहीं है। न ही लोग इसे प्राकृतिक एंटीबॉडी समझकर लापरवाही बरतें। वयस्कों की तरह बच्चों में भी कोरोना वायरस जानलेवा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार तीन नवजात में से एक बेबी ऑफ पिंकी की मौत बीते 10 जनवरी को दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में हुई। कमेटी ने ऑडिट में पाया कि नवजात को सेप्सिस के अलावा कोरोना संक्रमण की वजह से निमोनिया हो गया था। इनके अलावा 11 जनवरी को चाचा नेहरु अस्पताल में कार्तिक और लोकनायक अस्पताल में कर्णव की मौत हुई जिनकी आयु एक वर्ष से भी कम थी। कार्तिक थैलेसीमिया के अलावा हार्ट की बीमारी से ग्रस्त था। वहीं कर्णव को भी संक्रमण से पहले जन्मजात हार्ट की बीमारी थी।