उन्होंने कहा कि जैन ने जिंदल ट्रस्ट के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और वहां से कोई लेन देन नहीं है। सत्येंद्र जैन स्लीप एम्निया के शिकार हैं जो गंभीर स्थिति है। स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है और इससे अचानक मौत हो सकती है। ऐसे में 24 घंटे एक परिचारक की जरूरत होती है। अदालत से मांग है कि जैन को जमानत दें। एक मंत्री होने के नाते समाज से जुड़े और वह जांच के लिए उपलब्ध रहेंगे।
ईडी का पक्ष
एएसजी राजू ने कहा कि इस मामले की जांच में सामने आया कि नकदी को वैध बनाकर उपयोग में लाया जाता है। इस दौरान लाला शेर सिंह ट्रस्ट से भी इसी तरह के लेन-देन का पता चला। जब हमने उनसे पूछा तो उन्होंने यह नहीं कहा कि वह शेर सिंह ट्रस्ट से संबंधित हैं।
उन्होंने कहा कि हमने स्पष्ट रूप से उनसे ट्रस्ट के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट के बारे में कभी नहीं सुना। 10 जून को एक दस्तावेज सामने आया जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। वैभव जैन और अंकुश जैन सत्येंद्र जैन के बेनामीदार थे। जब सत्येंद्र जैन ने एक कंपनी छोड़ी तो अंकुश जैन के शेयर में वृद्धि हुई थी। वैभव जैन के अंजान होने की बात गलत है। इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती क्योंकि गवाहों को प्रभावित करने के प्रयास किए जा सकते हैं। इस संज्ञेय अपराध में प्राथमिकी दर्ज की गई है।