इस बीच पता चला कि आरोपी रात में कोसी कलां में रहते हैं। इसके बाद मैगसन रिसॉर्ट, कोसी कलां में दबिश देकर जगवीर को पकड़ लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि कोसी कलां में ग्राहक सेवा की दुकान चलाने वाला सतेंद्र उसके निर्देश पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। इसके बाद सतेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा प्राधिकरण के प्लॉट आवंटन से संबंधित जाली आवंटन पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया लैपटॉप भी सतेंद्र की दुकान से मिल गया।
आलीशान जीवन जीना चाहता था
कला संकाय से स्नातक जगवीर 2020 से प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़ा हुआ है। आरोपी कर्ज में डूबा था और आलीशान जीवन जी रहा था। वह दिल्ली और आसपास के इलाकों की नीलामी में प्लॉट खरीदने के इच्छुक लोगों की ग्रेनो प्राधिकरण से क्लीयरेंस सर्टिफिकेट दिलाने और अन्य कार्यों में मदद करता था। वह प्लॉट मालिकों के लिए टिन शेड और चहारदीवारी भी बनवाता था।
ऐसी शुरू की ठगी
जगवीर ने जल्द पैसे कमाने की साजिश रची और लोगों को बाजार मूल्य से कम दाम पर पक्का औद्योगिक प्लॉट दिलाने के लिए लालच देना शुरू किया। उसने पीड़ितों से सभी दस्तावेज लिए और दोस्त वर्षा के नाम पर बैंक खाता खोला। खाते में उसका ईमेल आईडी और फोन नंबर दर्ज था। वह इस खाते का संचालन कर रहा था। यहां से रकम अन्य खातों में स्थानांतरित करता था। ठगी की कमाई से उसने दो प्लॉट खरीदे थे। उसने सतेंद्र को फुसलाकर अपने निर्देशों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए राजी किया था। आरोपियों ने ज्यादातर पैसे बैंक खाते के माध्यम से और 75 लाख रुपये नकद प्राप्त किए हैं।