‘अब तक बैंक का 19 लाख रुपये का कर्ज मेरे नाम पर हो चुका है, लेकिन मेरे पास घर नहीं है। मैंने बैंक से कहा कि मेरा घर ले लो। मुझे घर नहीं चाहिए। इस घर ने मुझे बर्बाद कर दिया।’ आम्रपाली के ड्रीम वैली प्रोजेक्ट के घर खरीदार मोहम्मद इरफान ने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया।
उन्होंने बताया कि सितंबर 2015 में सबवेंशन स्कीम के तहत मैंने घर की बुकिंग कराई। इसके अंतर्गत बिल्डर को तब तक बैंक को ईएमआई भरनी पड़ती है जब तक वह कब्जा नहीं दे देता।
बैंक ने मेरा प्रोफाइल देखकर बिल्डर को एक बार में 15 लाख रुपये लोन दे दिया। इसके अलावा मैंने क्रेडिट कार्ड और इधर-उधर से जुटाकर 2.10 लाख रुपये दिए। बिल्डर ने जुलाई 2016 से ईएमआई देना बंद कर दिया। इसके बाद कुछ महीने तक मैंने किसी तरह से ईएमआई दी, लेकिन आर्थिक हालत खस्ता होने से ईएमआई नहीं दे पाया।
मेरे निर्णय से मेरा परिवार भी नाराज हो गया। इसी सदमे में मेरे पिता की मृत्यु हो गई। मैं ठेके पर इलेक्ट्रिक का काम करता हूं। अभी मेरे पास काम भी नहीं है। दो बच्चे हैं, जिनकी स्कूल की फीस और घर चलाना पड़ता है।