घटनास्थल के पास से गुजर रही छात्राओं को लगा कि वह सड़क हादसे में घायल हो गई है। वह छात्रा के उसके बैग से उसकी पहचान पत्र निकालकर फोन नंबर पर परिजनों को घटना की जानकारी दी। दुर्घटना की खबर मिलने के बाद परिजन मौके पर पहुंचे और छात्रा को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। परिजनों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस को डॉक्टरों से हुई बातचीत में पता चला कि छात्रा की हत्या का प्रयास किया गया है।
सूचना मिलते ही जिला पुलिस उपायुक्त मौके पर पहुंचे और छानबीन की। पुलिस अधिकारी ने मामले की जांच और आरोपी की धर पकड़ के लिए छह टीमें गठित की थीं। जांच के दौरान एक सीसीटीवी कैमरे में हमलावर को भागते हुए देखा गया था। पहले पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वह घर से गायब मिला। पुलिस आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उसे देर रात गिरफ्तार कर लिया।
जांच के दौरान छात्रा के परिजनों ने पुलिस को बताया कि दो माह पहले उन लोगों ने आरोपी के खिलाफ थाने में शिकायत दी थी। आरोपी छात्रा का पीछा करता था और उसे लगातार फोन कर परेशान करता था। शिकायत पर पुलिस ने आरोपी को थाने में बुलाकर उससे पूछताछ की थी। जिसमें आरोपी ने गलती होने की बात स्वीकार की थी और आगे से छात्रा का पीछा नहीं करने की बात कही थी। लेकिन परिवार वालों का आरोप है कि थाने से निकलते ही आरोपी ने हत्या करने की धमकी दी थी। जब परिवार वालों ने इसकी शिकायत की तो पुलिसकर्मियों ने कुछ नहीं करने की बात कहकर टाल दिया।