फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरीश रावत की जीत से बहुगुणा कैंप में खलबली

Tue, 29 Jul 2014 10:24 AM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अब अपने समर्थक विधायकों व नेताओं के संरक्षण और सुरक्षा में जुट गए हैं।
विज्ञापन


प्रदेश में हरीश रावत की बढ़ती राजनैतिक ताकत और हाल के उपचुनाव में उनके शतप्रतिशत रिपोर्ट कार्ड से बहुगुणा कैंप में खलबली और भविष्य को लेकर चिंता है।

फिलहाल बहुगुणा की चिंता और प्राथमिकता अपने सबसे करीबी विधायक सुबोध उनियाल को कहीं एडजेस्ट कराने की है। साथ ही उनका फोकस खुद को सितारगंज विधानसभा से मुक्त करा राज्यसभा में जाने का है।

अंबिका सोनी व केंद्रीय नेताओं से मिले बहुगुणा

बहुगुणा प्रदेश में गठित होने वाली संभावित प्रदेश कांग्र्रेस की कार्यकारिणी में भी अपनों की अधिक से अधिक दावेदारी सुनिश्चित कराना चाहते हैं।

विजय बहुगुणा सोमवार को दिल्ली में प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी और अन्य केंद्रीय नेताओं से मिले। बताते हैं बहुगुणा ने खुद को राज्यसभा भेजे जाने और समर्थक विधायक सुबोध उनियाल का सम्मानजनक पद दिलाने की पैरवी की है।

बहुगुणा खाली हुई राज्यसभा की सीट पर खुद की उम्मीदवारी भी पक्की कराना चाहते हैं। सूत्रों की मानें मंगलवार को देहरादून पहुंच रहे बहुगुणा मुख्यमंत्री से मिलकर सुबोध उनियाल और राज्य सभा सीट को लेकर चर्चा कर सकते हैं।

किशोर उपाध्याय को आलाकमान का आर्शीवाद

हरीश रावत ने कांग्रेस और सहयोगी सभी विधायकों को कुछ न कुछ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी है। सुबोध उनियाल को भी इसकी पेशकश हुई थी।

उस समय सुबोध उनियाल की नजर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर थी। अध्यक्ष की कुर्सी अपने कैंप में लाने के लिए बहुगुणा ने गढ़वाल और ब्राह्मण नेता का ब्रहस्त्र भी चला।

लेकिन हरीश रावत ने उन्हीं के अस्त्र का जवाब किशोर उपाध्याय के रूप में दे दिया। जो गढ़वाली होने के साथ ब्राह्मण भी हैं। चूंकि किशोर उपाध्याय को आलाकमान का भी आर्शीवाद था लिहाजा सुबोध उनियाल का बना बनाया काम बिगड़ गया।
विज्ञापन

मिला था चुनाव बाद एडजेस्ट करने का आश्वासन

किशोर को अध्यक्ष बनाने के बाद सुबोध उनियाल ने खुलकर अपना विरोध भी दर्ज कराया था। जिसके बाद केंद्रीय नेतृत्व से उन्हें चुनाव बाद एडजेस्ट करने का आश्वासन मिला था।

मुख्यमंत्री सोमवार को स्पष्ट तौर पर संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल के फेरबदल की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में सुबोध उनियाल को कहां और कैसे एडजेस्ट किया जाएगा यह देखना होगा।

मुख्यमंत्री अगर कैबिनेट में फेरबदल करते भी हैं तो डोईवाला से जीतकर आए पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट भी अपना दावा ठोंक सकते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें