भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को आगामी दो दिनों तक तीर्थयात्रा टालने की अपील की है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिले में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा के लिए जो तीर्थयात्री पांडुकेश्वर तक पहुंच गए हैं, वे जोशीमठ व अन्य सुरक्षित स्थानों में शरण लें। उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि आगामी दो दिनों तक के लिए यात्रा को टाल दें। जिला प्रशासन की ओर से जोशीमठ क्षेत्र के सरकारी विद्यालय भवनों में भी तीर्थयात्रियों को ठहरने की व्यवस्था की गई है। वहीं भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए पुलिस और नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की सलाह दी जा रही है।
पूर्णागिरि-रीठा साहिब यात्रा पर रोक
भारी बारिश के बीच जहां बनबसा में नगर पंचायत कार्यालय के पीछे वार्ड संख्या पांच में स्थित एक झाले पर सूखे पेड़ के गिरने से राम सिंह (68) की मौत हो गई। अलर्ट के मद्देनजर मां पूर्णागिरि धाम और रीठा साहिब सहित सभी धार्मिक यात्राओं को अगले आदेश तक प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया है। मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा पर रोक के बाद प्रशासन ने रविवार की शाम पूर्णागिरि दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को बूम से लौटा दिया।
वहीं, रविवार शाम छह बजे से टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। सोमवार को एनएच आवाजाही के लिए खोला जाएगा या नहीं, इस पर मौसम और सड़क के हालात को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा। शारदा नदी के तटीय इलाकों को खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नालों और नदी क्षेत्र में जाने पर रोक लगाई गई है।
प्रदेश में भारी बारिश को देखते हुए तीन दिन के अलर्ट के बीच तमाम स्थानों पर यात्रियों को रोका गया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को ताकीद किया है कि यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराते के साथ उनके रहने और भोजन आदि की उचित व्यवस्था की जाए। ताकि यात्री उत्तराखंड से अच्छा संदेश लेकर जाएं। यह बात उन्होंने सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए कही।
बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारियों से उनकी तैयारियों, बारिश की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली। कहा कि राज्य, जिलों और तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित किए जाएं। जिलों से इन दो दिन, हर घंटे रिपोर्ट भेजी जाए। कोई घटना होने पर इसकी सूचना तुरंत दी जाए। रिस्पांस टाइम कम से कम होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाए। आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, बीआरओ, एसडीआरएफ, राजस्व, पुलिस आदि आपसी समन्वय से काम करें। ट्रेकर्स के बारे में पूरी सूचना रखी जाए और उनसे संपर्क रखें। लैंडस्लाइड जोन पर विशेष ध्यान रखा जाए। रास्ते बंद होने पर तुरंत खोलने की व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि भूस्खलन आदि की स्थिति में लोग कहीं फंसे नहीं रहें। वह सुरक्षित स्थानों पर ठहरें। आपदा बचाव और राहत संबंधी उपकरण सुचारु स्थिति में हों। इसके साथ ही यात्रियों और पर्यटकों से भी सावधानी रखने की अपील की जाए, लेकिन इस दौरान किसी तरह का पैनिक न फैलने पाए। जिलाधिकारी और एसएसपी स्वयं मॉनिटरिंग करें।
बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक संजय गुप्ता, मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन, आईजी वी मुरुगेशन, आईजी एसडीआरएफ पुष्पक ज्योति, एसीईओ आपदा प्रबंधन रिद्धिम अग्रवाल, सहित वीडियो कांफ्रेंसिग से सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, बीआरओ, आईएमडी, आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, उत्तराखंड सब एरिया, सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।