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उत्तराखंड: चीन सीमा को जोड़ने वाला जोशीमठ-मलारी हाईवे बंद, 200 लोग रास्ते में फंसे

Sat, 14 Aug 2021 06:48 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

राज्य के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश अथवा गर्जना के साथ बौछार पड़ सकती हैं।
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मलारी में बंद हाईवे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शनिवार को फिलहाल सुबह से मौसम साफ बना रहा। वहीं रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर खुमेरा-देवीधार में आवासीय मकान का पुश्ता टूट गया है। यहां मकान के आंगन में दरारें भी पड़ गईं हैं।

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बारिश से कैंपटी फॉल में बढ़ा पानी, पर्यटकों को हटाया
मसूरी के कैंपटी में हुई भारी बारिश के चलते पुलिस ने पर्यटकों को सुरक्षा की दृष्टि से झरने और झील से बाहर किया। साथ ही व्यापारियों को भी दूर भेजा गया। फॉल में पानी बढ़ने से झील के पास पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। थानाध्यक्ष कैंपटी नवीन चंद्र जुराल ने बताया कि भारी बारिश से फॉल में पानी बहुत ज्यादा बढ़ गया। सुरक्षा की दृष्टि पर्यटकों को दूर भेजा गया। वहीं, कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर 12 लोगों के चालान किए गए। 

वर्तमान में गंगोत्री- यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात हेतु सुचारू है। रुद्रप्रयाग जिले में मौसम साफ बना हुआ है, धूप खिली रही। मसूरी में शनिवार को जमकर बारिश हुई। मसूरी-देहरादून मार्ग गलोगी धार में पहाड़ से मलबा और बोल्डर आने से खतरनाक हो गया है। मौके पर लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी और जेसीबी तैनात है।

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चीन सीमा को जोड़ने वाले जोशीमठ-मलारी हाईवे पर शनिवार को तमक गांव के समीप पहाड़ से दिनभर पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी रहा। इससे हाईवे पर दिनभर वाहनों की आवाजाही ठप रही। यहां हाईवे के दोनों ओर करीब 200 ग्रामीण फंसे हुए हैं।

सड़क बंद होने से यात्रियों ने सड़क पर काटी रात
नाचनी (पिथौरागढ़) में थल-मुनस्यारी सड़क पर तेजम अब नया भूस्खलन जोन बन गया है। गुरुवार की रात 10 बजे यहां पहाड़ी से सड़क पर मलबा आ गया और सड़क 14 घंटे बंद रही।

सड़क बंद होने से दोनों तरफ वाहनों की कतार लग गई। यात्रियों को रात दहशत में सड़क पर ही बितानी पड़ी। शुक्रवार की सुबह थल से मुनस्यारी जाने वाले वाहन भी मार्ग पर घंटों फंसे रहे। लोनिवि ने 14 घंटे बाद सड़क खोली। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे सड़क को सुचारू किया जा सका।

टैक्सी पर गिरा मलबा, बाल-बाल बचे सात यात्री
थल-मुनस्यारी सड़क पर सवारियों से भरी एक टैक्सी पर पहाड़ी से मलबा गिर गया। इस हादसे में बागेश्वर निवासी सात यात्री बाल-बाल बच गए जबकि कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। ये लोग मुनस्यारी घूमने जा रहे थे। हादसे के बाद सभी यात्रियों को टीआरसी विर्थी में ठहराया गया। 

मलारी हाईवे बंद होने से 200 ग्रामीण फंसे 

चीन सीमा को जोड़ने वाले जोशीमठ-मलारी हाईवे पर करीब 200 ग्रामीण फंसे हुए हैं। सेना के वाहनों की आवाजाही भी नहीं हो पा रही है। मलबे को हटा रही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की जेसीबी भी पहाड़ से गिर रहे पत्थरों की चपेट में आने से बाल-बाल बची। नीती घाटी के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से क्षेत्र में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की मांग उठाई है। 

हाईवे पर पत्थरों गिरने से 11 केवी की विद्युत लाइन भी टूट गई है। इससे दो दिन से नीती घाटी में तमक, जेलम, द्रोणागिरी, कागा, गरपक, जुम्मा, भापकुंड, कोषा, मलारी, कुरकुटी, महरगांव, बांपा, गमशाली और नीती गांव अंधेरे में बिजली आपूर्ति और संचार सेवा बाधित है। अ

नुसूचित जनजाति कल्याण समिति के महामंत्री दीवान सिंह खाती, गमशाली गांव के नरेंद्र सिंह रावत, बचन सिंह रावत, कुंवर सिंह रावत, देव सिंह फोनिया, मुन्ना बडवाल और गजेंद्र कुंवर ने बताया कि पहाड़ से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। हाईवे पर कई ग्रामीण फंसे हुए हैं। भलगांव के प्रधान लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि क्षेत्र में हुई बारिश से 11 अगस्त से तमक गांव के समीप चट्टान से पत्थर के गिरने का सिलसिला शुरू हुआ था, जो अब भी जारी है। ग्रामीण यहां पैदल आवाजाही भी नहीं कर पा रहे हैं।

चीन सीमा क्षेत्र मलारी, बांपा और नीती गांव में सेना व आईटीबीपी के कैंप हैं। तमक में विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण सेना कैंपों में भी चार दिन से बिजली सप्लाई ठप है। ऊर्जा निगम के एसडीओ वीके जैन ने बताया कि चट्टान से लगातार पत्थर छिटकने के कारण यहां विद्युत लाइन की मरम्मत नहीं हो पा रही है। 

नीती घाटी के दुंपुधार में प्रतिवर्ष 15 अगस्त का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जाता है। भोटिया जनजाति के ग्रामीण जश्न ए आजादी के कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांवों में पहुंचते हैं, लेकिन जेलम में मलारी हाईवे बंद होने से ग्रामीण अपने गांव नहीं पहुंच पा रहे हैं। महरगांव के लक्ष्मण सिंह रावत ने बताया कि वे 15 अगस्त के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शनिवार को देहरादून से सुरांईथोटा पहुंचे, लेकिन यहां हाईवे बाधित होने से वे अपने गांव नहीं पहुंच पा रहे हैं। 

तमक में पहाड़ से गिर रहे पत्थरों से मलारी हाईवे के खुलने और बंद होने का सिलसिला जारी है। यहां जेसीबी भी लगातार काम नहीं कर पा रही है। पत्थरों के छिटकने का सिलसिला रुकने पर हाईवे को खोल दिया जाएगा। 
- कर्नल मनीष कपिल, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
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दरकते पहाड़ों के कारण प्रदेश में 219 सड़कें बंद 

जोशीमठ-बदरीनाथ नेशनल हाईवे के सामने थैंग गांव को जोड़ने वाले मोटर मार्ग के ठीक नीचे भूस्खलन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो लोगों को इन दिनों पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने से डरा रहा है। जानकारों की मानें तो यह सही भी है, इन दिनों पहाड़ों की यात्रा टाली जाए तो ही बेहतर है। 

लोक निर्माण विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार शाम तक भूस्खलन के कारण प्रदेश में 219 सड़कें बंद थीं। जिन्हें खोलने की कार्रवाई की जा रही है। राज्य में फिलहाल सभी राष्ट्रीय राजमार्ग खुले हैं। लोनिवि की ओर से इन्हें खुला रखने के लिए 141 जेसीबी को लगाया गया है।

जबकि 11 राज्य मार्ग, पांच जिला मार्ग और कुल 191 ग्रामीण सड़कें मलबा आने के कारण अवरुद्ध हैं। इनमें 87 ग्रामीण सड़कें सिविल और 104 सड़कें पीएमजेएसवाई की हैं। शुक्रवार को 66 सड़कों से मलबा हटाकर उन्हें यातायात के लिए खोला गया। इसके अलावा 153 सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने की कार्रवाई जारी है। 

इधर, सचिवालय स्थित राज्य परिचालन केंद्र के अनुसार, उत्तरकाशी में लंबगांव-घनसाली- तिलवाड़ा मोटर मार्ग साडा के समीप मलब आने से पिछले कई दिनों से बंद है, जिसके 15 अगस्त तक खुलने की उम्मीद है। फिलहाल डूंडा-संकूर्णाधार मोटर मार्ग को वैकल्पिक मोटर मार्ग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिले में कुल पांच सड़कें बाधित हैं।

इसके अलावा देहरादून में दो, चमोली में 12, रुद्रप्रयाग में एक और पौड़ी में 33 सड़कें भूस्खलन की चपेट में आकर यातायात के लिए अवरुद्ध हैं। टिहरी में पांच, बागेश्वर में पांच, नैनीताल में चार, अल्मोड़ा में दो और चंपावत में तीन सड़कें बंद हैं। पिथौरागढ़ में तीन बॉर्डर रोड और सात ग्रामीण सड़कें बंद हैं। 

बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जिससे इस मौसम में सर्वाधिक भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। इनके कारण बंद होनी वाली सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जा रहा है। लोनिवि के मनीनरी और मजदूर इस काम में लगे हैं। 
- हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता, लोनिवि
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