छात्रवृत्ति पाने के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। जबकि पूर्व में प्रक्रिया अलग थी। बिचौलिए विद्यार्थियों के फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। जाति, आय व अन्य प्रमाणपत्र बनाकर एसडीएम, तहसीलदार व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर मुहर लगाई जाती थी। इन दस्तावेजों को एकत्र कर बाहरी राज्यों के स्कूलों को दिखाकर समाज कल्याण विभाग में पहुंचाया जाता था। जहां पटल सहायक, सहायक समाज कल्याण अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी और बिचौलिये एकराय होकर अलग अलग कोर्स के नाम पर छात्रवृत्ति जारी करते थे। दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही छात्रवृत्ति की रकम दे दी जाती थी।
हरीशनाथ गोस्वामी के मिले बैक डेट के हस्ताक्षर
दो दिन पहले जेल गए सहायक समाज कल्याण अधिकारी हरीशनाथ गोस्वामी के बैक डेट में हस्ताक्षर पाए गए हैं। हरीशनाथ ने जिस तारीख में विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया। उससे पहले ही विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये के चेक जारी हो गए थे। हरीशनाथ के सहायक समाज कल्याण अधिकारी रहते समय जगमोहन कफोला और अनुराग शंखधर समाज कल्याण अधिकारी थे। संभावना जताई जा रही है कि तीनों की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ होगा।
छात्रवृत्ति घोटाले में दर्ज मुकदमों की विवेचना में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। विद्यार्थियों के दस्तावेज सत्यापित होने से पहले ही करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए। समाज कल्याण विभाग के जिन अधिकारियों की लिप्तता घोटाले में सामने आई है उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। घोटालेबाज अन्य अधिकारियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
- ममता बोहरा, एसआईटी प्रभारी।