प्रदेश के कई जिलों में आज भी गैर रजिस्ट्री वाली भूमि पर हजारों परिवार काबिज हैं। इस तरह की भूमि पर बसे परिवारों को भूमिधरी का अधिकार पूर्व में सरकार ने वर्ष 2000 के सर्किल रेट के आधार पर देना तय किया था। 2016 में यह अधिकार 2012 के सर्किल रेट के आधार पर कर दिया।
अब भी इस मामले में कई आवेदन लंबित पड़े हुए हैं। प्रदेश के मैदानी जिलों में इस तरह के अधिक मामले हैं। प्रदेश सरकार पहले भी इस तरह की भूमि के पट्टेधारकों, अवैध कब्जाधारकों को भूमिधरी का अधिकार देने के विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर चुकी है। कैबिनेट की उप समिति की ओर से इस मामले को कैबिनेट में रखने का फैसला किया गया है।