शिकायत का आधार उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग का वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 की रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में आयोग ने छिबरो, डाकपत्थर और खोदरी में जल विद्युत परियोजनाओं में जीर्णोद्धार, सुधारीकरण और मरम्मत कार्यों में करोड़ों रुपये खर्च पर सवाल उठाए गए हैं।
करीब 95.86 करोड़ के मरम्मत के कार्य में बेहद महंगा सामान खरीदा गया। स्वीच यार्ड, ब्रेकर, वैक्यूम सर्किट की जो दरें यूजेवीएनएल की परचेज कमेटी ने तय की, वही सामान यूपीसीएल और पिटकुल में काफी कम दरों पर खरीदा गया। आरोप यह भी था कि परियोजना क्षेत्र में वेंटीलेशन के सिस्टम अनावश्यक रूप से लगा दिया गया।
शिकायत आई तो राजभवन ने मांगी रिपोर्ट
विद्युत नियामक आयोग के आदेश के आधार पर एक शिकायत राजभवन भी पहुंची। यूकेडी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एपी जुयाल ने यह शिकायत की। उनकी शिकायत पर राज्यपाल के सचिव बृजेश कुमार संत ने सचिव ऊर्जा से रिपोर्ट मांगी। जुयाल ने बताया कि मैंने राजभवन में शिकायत की है। प्रदेश सरकार और राज्यपाल से आरोपी के कार्यकाल की जांच और सेवा विस्तार न दिए जाने का अनुरोध किया। साथ ही विद्युत नियामक आयोग के आदेश के क्रम में जल विद्युत परियोजना में घपले की जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगमों में घपले न होते तो राज्य में बिजली सस्ती होती है और सरकार को आर्थिक मदद मिलती।