जाड़ा, बारिश और घाम झेलकर खाकी पहनने वाले सिपाही 24 घंटे सूबे में अमन की रखवाली करते हैं। अनुशासन की सख्त डोर से बंधे हैं। कानून के इन रखवालों की परवाज पर खुद कानून ने बंदिशें डाल रखी हैं। ये फ्रीडम ऑफ स्पीच जैसे सांविधानिक मूल अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते। आम सरकारी नौकरों की तरह न खुल कर ये अपनी बात रख सकते हैं, न ही खुद परचम लहरा कर सड़कों पर उतर सकते हैं।
ट्रेड यूनियन के सदस्यों की तरह हड़ताल की धमकी भी नहीं दे सकते। लेकिन वेतन विसंगतियों को लेकर इनके भीतर गुस्से का लावा बरसों से खदबदा रहा है। खुद आंदोलन नहीं कर सकते। लिहाजा अमन के रखवालों के घरवालों ने उनके आंदोलन का परचम लहराया है। प्रदेश भर में सिपाहियों की पत्नियां, बेटे-बेटियां और रिश्तेदार सड़कों पर उतर कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
भले ही प्रत्यक्ष रूप से सिपाही बेशक खुद अनुशासित दिख रहे हों परंतु जिस तरह से उनके घर वाले आंदोलन के हरावल दस्ते के रूप में सामने आए हैं, उसे एक कोमल बगावत जरूर कह सकते हैं। ऐसी सूरत किसी भी सरकार और पुलिस महकमे के आला अफसरों के लिए अप्रिय स्थिति का निर्माण कर सकती है। अमर उजाला ने सिपाहियों से जुड़े ग्रेड पे के मुद्दे के हर पहलू की पड़ताल की है...
सात साल पहले पड़ गया था विवाद का बीज
सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे के विवाद का बीज सात साल पहले ही पड़ गया था। यह विवाद था ग्रेड पे दिए जाने के लिए समय सीमा में बदलाव। पहले आठ, 12 और 22 का प्रावधान था। लेकिन, जैसे सिपाहियों के पहले बैच को 12 साल होने को आए इसे बदल दिया गया। यही नहीं इसके बाद भी इसमें बदलाव किया गया और जब जब फिर से नंबर आया तो 2800 ग्रेड पे दिए जाने की बात शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि बात प्रदर्शन तक आ पहुंची।
दरअसल, उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों की पहली भर्ती 2001 में हुई थी। उस वक्त पदोन्नति के लिए तय समय सीमा आठ, 12 व 22 साल थी। सिपाहियों की भर्ती के समय 2000 ग्रेड पे होता है। इसके बाद आठ साल बाद उन्हें 2400, 12 साल बाद 4600 और 22 साल की सेवा के बाद 4800 दिए जाने का प्रावधान था। अब इस बैच के सिपाहियों को वर्ष 2013 में 4600 रुपये ग्रेड पे का लाभ मिलना था। लेकिन, उससे पहले ही सरकार ने समय-सीमा में बदलाव कर दिया।
उस वक्त कहा गया कि अब यह लाभ उन्हें नई नीति 10, 16 व 26 वर्ष के आधार पर मिलना है। ऐसे में इन सिपाहियों को अब वर्ष 2017 में 4600 ग्रेड पे का लाभ दिया जाना था। मगर, उससे पहले ही समय-सीमा को बढ़ाकर 10,20 व 30 वर्ष का स्लैब कर दिया गया। इस हिसाब से इस साल 2001 बैच के सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे का लाभ दिया जाना था। लेकिन, अब पिछले दिनों शासन ने ग्रेड पे को ही घटा दिया। ऐसे में सिपाहियों का कहना है कि जब जब उनका नंबर आया तब नियम बदलकर उनके साथ धोखा किया गया।
3800 के आसपास मिल रहा तो नुकसान क्यों
सभी सिपाहियों की सेवा 20 साल की हो गई है। उन्हें इससे पहला ग्रेड पे 2400 का लगभग 11 साल पहले मिल गया था। ऐसे में वर्तमान तक देखें तो उन्हें लगभग 3800 ग्रेड पे लगभग का वेतन मिल रहा है। इस तरह यदि उन्हें 2800 ग्रेड पे दिया जाता है तो उन्हें वेतन में भारी नुकसान होगा।