फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड पुलिस ग्रेड पे: सड़कों पे क्यों हैं? अमन के रखवालों के घरवाले, पढ़ें खास रिपोर्ट

Wed, 28 Jul 2021 04:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे के विवाद का बीज सात साल पहले ही पड़ गया था। यह विवाद था ग्रेड पे दिए जाने के लिए समय सीमा में बदलाव। पहले आठ, 12 और 22 का प्रावधान था। लेकिन, जैसे सिपाहियों के पहले बैच को 12 साल होने को आए इसे बदल दिया गया।
विज्ञापन
ग्रेड पे को लेकर धरने पर बैठे पुलिसकर्मियों के परिजन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जाड़ा, बारिश और घाम झेलकर खाकी पहनने वाले सिपाही 24 घंटे सूबे में अमन की रखवाली करते हैं। अनुशासन की सख्त डोर से बंधे हैं। कानून के इन रखवालों की परवाज पर खुद कानून ने बंदिशें डाल रखी हैं। ये फ्रीडम ऑफ स्पीच जैसे सांविधानिक मूल अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते। आम सरकारी नौकरों की तरह न खुल कर ये अपनी बात रख सकते हैं, न ही खुद परचम लहरा कर सड़कों पर उतर सकते हैं।

विज्ञापन


ट्रेड यूनियन के सदस्यों की तरह हड़ताल की धमकी भी नहीं दे सकते। लेकिन वेतन विसंगतियों को लेकर इनके भीतर गुस्से का लावा बरसों से खदबदा रहा है। खुद आंदोलन नहीं कर सकते। लिहाजा अमन के रखवालों के घरवालों ने उनके आंदोलन का परचम लहराया है। प्रदेश भर में सिपाहियों की पत्नियां, बेटे-बेटियां और रिश्तेदार सड़कों पर उतर कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

भले ही प्रत्यक्ष रूप से सिपाही बेशक खुद अनुशासित दिख रहे हों परंतु जिस तरह से उनके घर वाले आंदोलन के हरावल दस्ते के रूप में सामने आए हैं, उसे एक कोमल बगावत जरूर कह सकते हैं। ऐसी सूरत किसी भी सरकार और पुलिस महकमे के आला अफसरों के लिए अप्रिय स्थिति का निर्माण कर सकती है। अमर उजाला ने सिपाहियों से जुड़े ग्रेड पे के मुद्दे के हर पहलू की पड़ताल की है...
विज्ञापन


सात साल पहले पड़ गया था विवाद का बीज
सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे के विवाद का बीज सात साल पहले ही पड़ गया था। यह विवाद था ग्रेड पे दिए जाने के लिए समय सीमा में बदलाव। पहले आठ, 12 और 22 का प्रावधान था। लेकिन, जैसे सिपाहियों के पहले बैच को 12 साल होने को आए इसे बदल दिया गया। यही नहीं इसके बाद भी इसमें बदलाव किया गया और जब जब फिर से नंबर आया तो 2800 ग्रेड पे दिए जाने की बात शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि बात प्रदर्शन तक आ पहुंची।

दरअसल, उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों की पहली भर्ती 2001 में हुई थी। उस वक्त पदोन्नति के लिए तय समय सीमा आठ, 12 व 22 साल थी। सिपाहियों की भर्ती के समय 2000 ग्रेड पे होता है। इसके बाद आठ साल बाद उन्हें 2400, 12 साल बाद 4600 और 22 साल की सेवा के बाद 4800 दिए जाने का प्रावधान था। अब इस बैच के सिपाहियों को वर्ष 2013 में 4600 रुपये ग्रेड पे का लाभ मिलना था। लेकिन, उससे पहले ही सरकार ने समय-सीमा में बदलाव कर दिया।

उस वक्त कहा गया कि अब यह लाभ उन्हें नई नीति 10, 16 व 26 वर्ष के आधार पर मिलना है। ऐसे में इन सिपाहियों को अब वर्ष 2017 में 4600 ग्रेड पे का लाभ दिया जाना था। मगर, उससे पहले ही समय-सीमा को बढ़ाकर 10,20 व 30 वर्ष का स्लैब कर दिया गया। इस हिसाब से इस साल 2001 बैच के सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे का लाभ दिया जाना था। लेकिन, अब पिछले दिनों शासन ने ग्रेड पे को ही घटा दिया। ऐसे में सिपाहियों का कहना है कि जब जब उनका नंबर आया तब नियम बदलकर उनके साथ धोखा किया गया।

3800 के आसपास मिल रहा तो नुकसान क्यों
सभी सिपाहियों की सेवा 20 साल की हो गई है। उन्हें इससे पहला ग्रेड पे 2400 का लगभग 11 साल पहले मिल गया था। ऐसे में वर्तमान तक देखें तो उन्हें लगभग 3800 ग्रेड पे लगभग का वेतन मिल रहा है। इस तरह यदि उन्हें 2800 ग्रेड पे दिया जाता है तो उन्हें वेतन में भारी नुकसान होगा।

सिपाहियों को नहीं भा रहा बीच का रास्ता

सिपाहियों को मनाने के लिए अफसर और सरकार बीच का रास्ता तलाशने में जुटे हैं। उन्हें 4600 की जगह 4200 ग्रेड पे के साथ एएसआई (सहायक सब इंस्पेक्टर) का पद देने पर विचार हो रहा है। सिपाही इस पर भी राजी नहीं हैं। सिपाहियों का कहना है कि इससे भी उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा। यही नहीं यह व्यवस्था तकनीकी रूप से भी ठीक नहीं है, लिहाजा सरकार इसमें कभी भी पलट सकती है।

कहीं नहीं है 4200 के साथ यह व्यवस्था
दरअसल, सिपाहियों को डर है कि यह व्यवस्था पूरे देश में कहीं नहीं है। 4200 ग्रेड के साथ किसी भी राज्य पुलिस में एएसआई का पद नहीं है। यह पद केवल 2800 ग्रेड पे के साथ में होता है। ऐसे में डर है कि नियमों का हवाला देते हुए सरकार इसमें कभी भी पलट सकती है।

तो फिर दरोगा का भी 4200 ग्रेड पे करे सरकार
वेतन विसंगति को लेकर सिपाहियों के भी अलग तर्क हैं। इनमें सिपाहियों का कहना है कि 20 साल की सेवा के बाद दरोगा का ग्रेड पे उन्हें दिया जाता था। अब यदि सरकार उन्हें 4200 ग्रेड पे दे रही है। तो दरोगाओं का भी ग्रेड इसके समान ही कर देना चाहिए। 

तो क्या उत्तरप्रदेश का वेतनमान लागू करेगी सरकार
पुलिस जवानों के ग्रेड पे की समस्या के समाधान के लिए सरकार दूसरे राज्यों के पुलिस कर्मचारियों के वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन कर रही है। दिल्ली और हरियाणा पुलिस में 2800 ग्रेड वेतनमान का भी प्रावधान है, जबकि उत्तरप्रदेश के ग्रेड वेतन में उत्तराखंड से काफी समानता है। सूत्र बता रहे हैं कि सरकार यूपी पुलिस का वेतनमान अपना सकती है।

अब सरकार यूपी के पुलिस कर्मियों के ग्रेड पे पर विचार कर बीच का कोई रास्ता निकाल रही है।
राज्य  -आरक्षी  - मुख्य आरक्षी   - सहायक उपनिरीक्षक-  उपनिरीक्षक निरीक्षक
उत्तराखंड -2000 - 2400      -       4600   -   4800
यूपी    - 2000 -  2400     -         4200   -   4600
हिमाचल- 1900 - 2400  -   3000   -       4600 -   4800
पंजाब -  1900  - 2400      -         4200    -   4600 
दिल्ली पुलिस -2000  -2400  -2800    -     4200   -     4600   
हरियाणा - 2000     -   2400-  2800     -    4200       -  4600
(नोट: उत्तराखंड का ग्रेड वेतन 2016 तक के हैं)

सरकार को बेसुरे लगे विरोध के सुर
प्रदेश सरकार को पुलिस के जवानों के समर्थन में आंदोलन के सुर रास नहीं आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ग्रेड वेतन की पहेली को सुलझाने को लेकर गंभीर थी, लेकिन विरोध के सुरों ने उसे ठिठका दिया है। दरअसल, विरोध की आहट के सुर कानों में पड़ने के बाद ग्रेड वेतन की समस्या का समाधान करने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष सुबोध उनियाल आगे आए थे। उन्होंने बाकायदा एक वीडियो संदेश के जरिये पुलिस के जवानों को समझाने का प्रयास किया था कि वे ऐसा कुछ न करें जिससे उनके द्वारा स्थापित अनुशासन पर आंच आए।

सियासत शुरू, कहीं बिगड़ न जाए खेल
ग्रेड वेतन के मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, यूकेडी समेत कई दलों ने पुलिस कर्मियों की मांग के मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। राजनीतिक दल खुलकर पुलिस कर्मियों के परिजनों के समर्थन में उतर आए। कर्मचारी नेताओं ने भी  आंदोलन को अपना  समर्थन दिया।
 
विज्ञापन

हम हल निकाल रहे सिपाही चिंता न करें : डीजीपी

ग्रेड पेड विवाद को शांत करने के लिए डीजीपी और अन्य अधिकारी बार-बार अपील कर चुके हैं। अब भी डीजीपी अशोक कुमार का कहना है कि वह शासन के साथ मिलकर इस मामले का हल निकालने में जुटे हुए हैं। सिपाहियों को संयम बरतना चाहिए। साथ ही उनके परिजनों से भी अपील है कि वह किसी तरह के बहकावे में न आएं।

हम हल निकालने में जुटे हुए हैं। सिपाहियों और उनके परिजनों से अपील है कि वह किसी के बहकावे में न आएं। सिपाहियों को संयम बरतना चाहिए। इस मामले को तूल देने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री भी आश्वासन दे चुके हैं कि इस मामले का सकारात्मक हल निकलेगा।
-अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड

यह है चिंता की वजह
एक जनवरी 2017 से लागू एसीपी की तरह निश्चित अवधि में मिलने वाली पदोन्नति लाभ के बदले तय वेतनमान इसकी वजह है। बदली व्यवस्था में वे 4600 ग्रेड वेतनमान से वंचित हो रहे हैं। नई व्यवस्था में 2800 और 4200 ग्रेड वेतन की श्रेणी शामिल हुई है। यही व्यवस्था पुलिस के जवानों को नहीं सुहा रही है और उनके परिजन सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। 

फैसला लेने में देर क्यों हो रही है
पुलिस कर्मियों के ग्रेड वेतनमान को लेकर आखिर सरकार को फैसला लेने में देर क्यों हो रही है। इसकी वजह दूसरे संवर्ग के उन हजारों कर्मचारी पुरानी एसीपी की मांग मानी जा रही है। वे अश्योर्ड कैरियर प्रमोशन (एसीपी) की पुरानी व्यवस्था के 10, 16, 26 वर्ष में पदोन्नति के बदले वेतनवृद्धि की मांग कर रहे हैं। पुलिस कर्मचारियों को सरकार पुरानी एसीपी की तरह लाभ देगी और प्रदेश के दूसरे कर्मचारी भी मांग उठाएंगे।

पुरानी व्यवस्था में 4800 ग्रेड पे का था प्रावधान
2016 तक प्रदेश के पुलिस कर्मचारियों को अपने सेवाकाल के दौरान एमएसीपी व्यवस्था के तहत 2400, 4600 और 4800 ग्रेड पे की तीन वेतन वृद्धि की सुविधा थी। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद ये 2400, 2800 और 4200 में तब्दील हो गई। वित्त विभाग ने 2800 ग्रेड पे का नया स्केल शामिल किया और तीसरी वेतन वृद्धि 4200 कर दी। यही पुलिस कर्मचारियों की नाराजगी प्रमुख वजह है।

क्या समाधान निकलेगा
अब प्रश्न यह है सरकार ग्रेड वेतन की पहेली का क्या समाधान निकालेगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडलीय उपसमिति कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है। मिसाल के तौर पर सरकार 2800 ग्रेड वेतन को हटा सकती है और उसके स्थान 4200 ग्रेड वेतन कर सकती है। ऐसे में पुलिस कर्मियों को 4800 ग्रेड वेतन का लाभ मिल जाएगा।

जनवरी 2017 से लागू एमएसीपी व्यवस्था
पदनाम   -      सीधी भर्ती - पहली पदोन्नति- दूसरी  तीसरी     
पुलिस कांस्टेबल- 2000 -  2400 -    2800 -      4200

31 दिसंबर 2016 तक लागू एसीपी व्यवस्था
 पुलिस कांस्टेबल  -2000  -  2400  -4600  -     4800
(नोट : धनराशि विभिन्न ग्रेड पे की। पुलिस फोर्स के ढांचे में 2800 और 4200 का पद सृजित नहीं है)।

सरकार की अपील बेअसर
ग्रेड पे मामले में हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस कर्मियों और उनके परिजनों से धैर्य रखने की अपील की गई थी, लेकिन वे मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष सुबोध उनियाल ने उनसे अपील की थी कि सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सब कमेटी बनाई और सरकार पुलिस जवानों के हितों के लिए संकल्पबद्ध है। 

पुलिस के परिजनों के समर्थन में आए कई संगठन
ग्रेड पे को लेकर आंदोलन कर रहे पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ कई संगठनों ने भी हाथ से हाथ मिलाकर लड़ाई लड़ने का आश्वासन दिया है। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि यह संघर्ष केवल पुलिसकर्मियों का ही नहीं है, बल्कि एसीपी की इस समस्या से प्रदेश के सभी कर्मचारी जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका संगठन पुलिसकर्मियों के साथ ही प्रदेश के सभी कार्मिकों के हित में इस आंदोलन में अपना समर्थन दे रहा है।

उधर, उत्तराखंड एससी-एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने भी पुलिसकर्मियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। प्रांतीय अध्यक्ष करम राम और प्रांतीय महासचिव हरि सिंह ने शासकीय प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को इस संबंध में ज्ञापन दिया है। उन्होंने कहा है कि उनका संगठन इस आंदोलन में साथ है। दूसरी ओर, दून केंद्रीय पेंशनर एसोसिएशन ने भी पुलिसकर्मियों के परिजनों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है कि जो पुलिसकर्मी 24 घंटे जनता की सेवा में मुस्तैद रहते हैं, नियम विरुद्ध उनका ग्रेड वेतन घटाया जाना सरासर गलत है। उनका संगठन इसका विरोध करता है। ब्यूरो 

24 घंटे की ड्यूटी का यह फल मिलेेगा सोचा नहीं था’
सिपाहियों के परिजनों का कहना है कि 24 घंटों की ड्यूटी का सरकार यह फल देगी इस बात को कभी सोचा नहीं था। पुलिस सिपाहियों का भी परिवार है उसे चलाने के लिए भी धन की आवश्यकता होती है। सरकार तो बढ़ाने के बजाय अब इसे कम करने पर आमादा है। ऐसे में सरकार से इसमें सकारात्मक हल निकालने की अपील करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें