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Uttarakhand News : ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का काम में अब आएगी तेजी

Fri, 29 Jan 2021 03:45 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन - फोटो : ट्वीटर
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ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का काम अब तेजी पकड़ेगा। प्रदेश सरकार ने परियोजना में अनुबंधित ठेकेदारों को परियोजना क्षेत्र में स्टोन क्रशर लगाने, खनिज सामग्री का भंडारण करने और रिवर ट्रेनिंग के नियमों में छूट दे दी है। इस संबंध में औद्योगिक विकास (खनन) ने अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। 

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अपर सचिव (औद्योगिक विकास) डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने ये अधिसूचनाएं जारी की हैं। रेलवे विकास निगम ने राज्य सरकार से उपखनिज नीति में छूट मांगी थी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर सैद्धांतिक सहमति बनीं। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर उससे सिफारिश मांगी। सिफारिश मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने अनुमोदन किया। औद्योगिक विकास (खनन) ने इसकी अधिसूचनाएं जारी कीं।

परियोजना के ठेकेदार लगा सकेंगे स्टोन क्रशर

शासन ने ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के लिए उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट हाट मिक्स प्लांट रेडिमिक्स प्लांट अनुज्ञा नीति में संशोधन किया। नीति के तहत परियोजना के ठेकेदार को परियोजना की अवधि या मांगी गई अवधि तक स्टोन क्रशर व अन्य प्लांट लगाने की स्वीकृति होगी। इसके लिए निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म इकाई को आवेदन व निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति भौतिक निरीक्षण करेगी। उसकी सिफारिश पर राज्य सरकार अनुमति देगी।
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भंडारण के नियमों में ठेकेदारों को दी छूट

राज्य सरकार अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण को लेकर नियमावली बनाई है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्यों के लिए इस नियमावली में ढील दी गई है। संशोधन के अनुसार, परियोजना के ठेकेदारों पर नियमावली के प्रावधान लागू नहीं होंगे। वे भंडारण के लिए निर्धारित शुल्क व आवेदन जमा कर खनन सामग्री का भंडारण कर सकेंगे। नियमावली के प्रावधान रेल लाइन परियोजना की कार्यदायी एजेंसी रेल विकास परियोजना लिमिटेड के अनुबंधित ठेकेदारों पर लागू नहीं होंगे।

रिवर ट्रेनिंग नीति में भी दी गई ढील

परियोजना के ठेकेदारों पर उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति के कई प्रावधान लागू नहीं होंगे। संशोधित नीति के अनुसार, निदेशक भूतत्व व खनिकर्म इकाई की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति गठित की गई है, जो अनुबंधित ठेकेदार के चिन्हित स्थल का सत्यापन और समयावधि का निर्धारण करेगी। उसकी सिफारिश पर उपखनिज आरबीएम निकालने की अनुमति दी जाएगी।  उपखनिज निकालने के लिए ठेकेदार को  ईरवन्ना पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा।

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