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उत्तराखंड: यूपीसीएल के करोड़ों का हेरफेर करने वाली कंपनी के आरोपी बहाल, कार्रवाई से पहले ही तैनाती भी

Mon, 27 Dec 2021 01:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून

सार

ऊर्जा निगम ने सरप्लस बिजली को बाजार में बेचने का जिम्मा मित्तल क्रिएटिव कंपनी को दिया। कंपनी ने करीब 56 करोड़ की बिजली बाजार में बेची जरूर, लेकिन समय पर ऊर्जा निगम को भुगतान नहीं किया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
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विस्तार
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड की बेची गई बिजली में करीब 70 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपी तीन निलंबित अधिकारियों को बहाल कर दिया गया है। 14 महीने में भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। इससे पहले तीन आरोपी अधिकारी रिटायर होकर पेंशन पा रहे हैं। कंपनी ने अभी तक रकम नहीं लौटाई है। 

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दरअसल, ऊर्जा निगम ने सरप्लस बिजली को बाजार में बेचने का जिम्मा मित्तल क्रिएटिव कंपनी को दिया। कंपनी ने करीब 56 करोड़ की बिजली बाजार में बेची जरूर, लेकिन समय पर ऊर्जा निगम को भुगतान नहीं किया था। मार्च 2020 में कोरोना के बाद पैसा आना काफी कम हो गया था। पूर्व में भी भुगतान में देरी होती रही। 56 करोड़ के बकाये के साथ ही लेट पेमेंट सरचार्ज भी 16 करोड़ रुपये पहुंच गया था।

कुल 72 करोड़ का भुगतान लंबित था, जिसका संज्ञान यूपीसीएल ने लिया। तत्कालीन निदेशक परियोजना, निदेशक वित्त और वरिष्ठ विधि अधिकारी की जांच समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर यूपीसीएल प्रबंधन ने छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। 12 अधिकारियों को चार्जशीट दी गई थी और तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिया था।
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इन्हें किया गया था सस्पेंड
महाप्रबंधक वित्त मोहम्मद इकबाल
सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर बृज मोहन सिंह
सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सुनील वैद्य
एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अर्जुन प्रताप सिंह
वरिष्ठ लेखाधिकारी राकेश चंद्र
सहायक लेखाधिकारी अवनीश गुप्ता

इन्हें दिया गया था कारण बताओ नोटिस
तत्कालीन चीफ इंजीनियर एके सिंह, गणेश सिंह, महाप्रबंधक अनिल मित्तल

इन्हें दी गई थी चार्जशीट
चीफ इंजीनियर एसके टम्टा, रजनीश अग्रवाल, एक्सईएन प्रवेश कुमार, लेखाधिकारी एसके मेहता, एई मनीष पांडे, लेखाकार होशियार सिंह सहित 12 लोग।

वक्त के साथ ठंडा पड़ता चला गया मामला
यूपीसीएल के इस मामले की जांच तो बैठाई गई थी लेकिन एक साल से ऊपर का वक्त गुजर चुका है, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले में आरोपी मोहम्मद इकबाल, सुनील वैद्य और राकेश चंद्र रिटायर्ड हो चुके हैं। अब यूपीसीएल ने बचे हुए सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर बृज मोहन सिंह, एक्सईएन अर्जुन प्रताप सिंह और सहायक लेखाधिकारी अवनीश गुप्ता का निलंबन भी खत्म कर दिया है।

कंपनी ने खड़े किए हाथ तो यूपीसीएल पहुंचा कोर्ट
बिजली बेचकर पैसा न लौटाने वाली कंपनी ने रकम जमा करने से हाथ खड़े कर दिए थे। अब मामले में यूपीसीएल कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि रकम किस हिसाब से यूपीसीएल को वापस मिलेगी।

इस आधार पर किए गए बहाल
जिन तीन आरोपी अधिकारियों को बहाल किया गया था, उसका आधार भी मामले की जांच की लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। कहा गया है कि चूंकि अधिकारियों ने अपने जवाब दे दिए थे और छह माह से अधिक का समय बीत चुका था। इसलिए यूपीसीएल प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक(अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-4 के उप नियम(1) के तहत उन्हें बहाल कर दिया गया है।

ऐसे हुआ नुकसान
दरअसल, यूपीसीएल बाजार से जो बिजली खरीदता था, उसमें से बची हुई बिजली कंपनी के माध्यम से बाजार में वापस बेची जाती थी। इस बिजली को बेचने वाली कंपनी को एक निश्चित रकम यूपीसीएल को लौटानी होती थी। लेकिन कंपनी ने लंबे समय से रकम नहीं लौटाई और यूपीसीएल के अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे रहे। इससे यूपीसीएल को करीब 70 करोड़ का नुकसान हुआ।

बहाल नहीं किया गया है। चूंकि उन्होंने अपने प्रतिउत्तर दे दिए हैं और उन पर कोई आपराधिक मामला नहीं है इसलिए केवल निलंबन समाप्त किया गया है। करीब डेढ़ साल का समय हो गया था। वह न तो जांच प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं और न ही यूपीसीएल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जांच समिति छह माह के भीतर निर्णय नहीं ले पाई है, इसलिए नियमानुसार उनका निलंबन समाप्त किया गया है। जब जांच पूरी हो जाएगी। इसके बाद उन्होंने जो भी अपराध किया होगा, उसकी उन्हें पूरी सजा मिलेगी।
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-अनिल कुमार, एमडी, यूपीसीएल

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