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21 साल का हुआ उत्तराखंड: विकास की राह में खड़े चुनौतियों के पहाड़, उठ रहे कई सवाल

Tue, 09 Nov 2021 01:01 PM IST
अलका त्यागी राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून

सार

Uttarakhand Foundation Day Today: शिखर चूमने के लिए राज्य को चुनौतियों का पहाड़ लांघना होगा। उत्तराखंड ने 21 साल में तरक्की की कई नई इबारतें को लिखीं।
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड राज्य के गठन को 21 साल पूरे हो गए हैं। जवानी की दहलीज पर पहुंचे उत्तराखंड ने अपनी इस विकास यात्रा में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं। नौजवान उत्तराखंड में विकास की संभावनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देखा है। उनका यह कहना कि अगला दशक उत्तराखंड होगा, राज्य के लिए एक सुखद संकेत है।

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मगर क्या यह इतना सहज है? देश का अग्रणी राज्य बनने के लिए उत्तराखंड को चुनौतियों का पर्वत लांघना होगा। शिखर चूमने के लिए राज्य को चुनौतियों का पहाड़ लांघना होगा। उत्तराखंड ने 21 साल में तरक्की की कई नई इबारतें को लिखीं।

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 21 साल: तमाम योजनाएं बनीं लेकिन नहीं रुकी पलायन की गति, आज भी जस के तस हालात
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अवस्थापना विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, उद्योग, मानव संसाधन, कानून व्यवस्था के क्षेत्र में प्रदेश विकास की ऊंचाइयां भी छुई हैं। लेकिन पर्यावरणीय रूप से अति संवेदनशील इस हिमालयी राज्य के सुदूर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में अवस्थापना, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, पलायन आदि समस्याओं को देखते हैं तो एकबारगी मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं हमने विकास का गलत मॉडल तो नहीं अपना लिया।

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प्रमुख बाधाएं

1. पर्यावरण: राज्य के विकास मॉडल के सामने वन कानून और पर्यावरण बड़ी चुनौती है। राज्य जल विद्युत, अवस्थापना, उद्योग से जुड़े कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर्यावरणीय मानकों के कारण सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं।
2. राज्य पर बढ़ता कर्ज: सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड पर 65 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। कैग रिपोर्ट ने हाल में यह जानकारी दी। राज्य सरकार आय के नए संसाधन नहीं जुटा पा रही है। जीएसटी प्रतिपूर्ति की 2022 में मियाद खत्म हो जाने से राज्य की आर्थिक दिक्कतें बढ़ेंगी।
3. रोजगार: राज्य गठन के समय साढ़े तीन लाख पंजीकृत बेरोजगार थे। 21 साल में इनकी संख्या आठ से 10 लाख के बीच पहुंच चुकी है।
4. पलायन: पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अभाव में पलायन सबसे बड़ी चुनौती है। लोग घर-बार छोड़कर आजीविका के लिए शहरों और कस्बों में बस रहे हैं।
5. स्वास्थ्य व शिक्षा: 21 सालों में राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार तो हुआ है। लेकिन पहाड़ और मैदान के बीच खाई काफी बड़ी है। राज्य के मैदानी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ। लेकिन पहाड़ में आज भी डाक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।
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