राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन औद्योगिक विकास का ये मॉडल पहाड़ों से पलायन नहीं रोक पाया। प्रदेश का औद्योगिक विकास मैदानी जिलों तक सीमित रहा। अवस्थापना विकास, कनेक्टिविटी समस्या और आपदा जैसी चुनौती के आगे पहाड़ों में उद्योग स्थापित नहीं हो पाए। राज्य बनने के बाद 21 साल में 49 हजार से अधिक लघु एवं सूक्ष्म उद्योग स्थापित हुए हैं। जिससे राज्य की जीडीपी में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत से बढ़ 49 प्रतिशत हो गई है।
नौ नवंबर 2000 को राज्य गठन के समय उत्तराखंड में 14163 लघु एवं सूक्ष्म और 46 बड़े उद्योग ही स्थापित थे। पहले राज्य का यह भू-भाग शून्य उद्योग के लिए जाना जाता था। वर्ष 2003 में विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज के बाद राज्य में औद्योगिक विकास ने रफ्तार पकड़ी है। 21 साल में उत्तराखंड ने औद्योगिक विकास में तरक्की की है। जिससे राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है। जहां पर जीडीपी में उद्योग क्षेत्र का अंश 19.2 प्रतिशत था। जो बढ़ कर 49 प्रतिशत से अधिक हो गया है। इसमें विनिर्माण क्षेत्र का योगदान लगभग 36 प्रतिशत है।
राज्य के औद्योगिक विकास का मॉडल पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में सफल नहीं हो पाया है। राज्य गठन के बाद रोजगार के लिए पहाड़ों से तेजी से पलायन हुआ है। अब सरकार का पहाड़ों में स्थानीय उत्पादों पर आधारित लघु व सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस है। जिससे रोजगार के अवसर सृजित होने से पलायन को रोका जा सके।
एमएसएमई उद्योगों में 12778 करोड़ का निवेश
राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में 49809 एमएसएमई उद्योग स्थापित हुए हैं। जिसमें 12778 करोड़ का निवेश हुआ है। इससे 2.82 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला। राज्य बनने से पहले उत्तराखंड में कुल 14163 लघु उद्योग स्थापित थे। जिसमें 700 करोड़ का निवेश किया गया था। वहीं, 46 बड़े उद्योग स्थापित थे। वर्तमान में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जिले में 327 बड़े उद्योग स्थापित हैं।
उत्तराखंड को एक नए आर्थिक विकास के मॉडल की जरूरत है। जिसमें औद्योगिक विकास भी शामिल है। इस मॉडल में बैकवर्ड और फारवर्ड लिंकेज दोनों ही शामिल है। राज्य बनने के बाद औद्योगिक विकास में तेजी आई है, लेकिन पहाड़ों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण औद्योगिक विकास नहीं हुआ है। जो लघु उद्योग स्थापित हुए हैं, उन्हें नुकसान होने पर मदद नहीं मिली है। जिससे उनका मनोबल टूटा है।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड