बाजार में फूलों की बढ़ती मांग को देेखते हुए किसानों में पुष्प उत्पादन में रुचि बढ़ रही है। राज्य गठन से पहले उत्तराखंड में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती होती थी। जो बढ़कर 1600 हेक्टेयर पहुंच गई है।
उत्तराखंड में फूलों की खेती के लिए किसान आगे आ रहे हैं। जिससे राज्य गठन के बाद प्रदेश में फूलों की खेती का रकबा बढ़ा है। पिछले 20 सालों में पुष्प उत्पादन का क्षेत्रफल नौ प्रतिशत बढ़ा है। वर्तमान में राज्य में 250 करोड़ का फूलों का कारोबार हो रहा है।
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राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां और जलवायु फूलों की खेती के उपयुक्त है। बाजार में फूलों की बढ़ती मांग को देेखते हुए किसानों में पुष्प उत्पादन में रुचि बढ़ रही है। राज्य गठन से पहले उत्तराखंड में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती होती थी। जो बढ़कर 1600 हेक्टेयर पहुंच गई है। खास बात यह है कि फूलों की खेती को जंगली जानवर और बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। संरक्षित खेती के तहत किसान पाली हाउस लगाकर पुष्प उत्पादन कर रहे हैं।
नैनीताल जिले में मुख्य रूप से कट फ्लावर का उत्पादन
राज्य के किसान गुलाब गेंदा, रजनीगंधा, कोरेनेशन, ग्लेडियोलस, लीलियम, गुलदाउदी समेत अन्य किस्मों के फूलों की खेती कर रही है। वर्तमान में राज्य में कट फ्लावर का 3322 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले में मुख्य रूप से कट फ्लावर का उत्पादन किया जा रहा है।
प्रदेश से दिल्ली, मेरठ, कानपुर, लखनऊ, चंडीगढ़ समेत अन्य महानगरों में लगभग 250 करोड़ का फूलों का कारोबार हो रहा है। उद्यान निदेशक डा. एचएस बवेजा का कहना है कि प्रदेश के किसान व्यावसायिक रूप में पुष्प उत्पादन कर रहे हैं। सरकार की ओर से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा जा रहा है। यही वजह है कि प्रदेश में लगातार पुष्प उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ रहा है।