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उत्तराखंड चुनाव 2022: पूर्व फौजियों के ‘सहारे’ उत्तराखंड का सियासी समर जीतने की चाहत, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

Wed, 18 Aug 2021 04:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल कोठियाल की आहट के चलते पहले ही उत्तराखंड में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट को केंद्र में रक्षा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी।
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उत्तराखंड में चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सैन्य बाहुल्य प्रदेश उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों के बीच  सैनिकों व पूर्व सैनिकों के वोटों के लिए होड़ मचनी शुरू हो गई है। पूर्व सैनिक परिवारों से जुड़े करीब साढ़े बारह लाख वोटरों को रिझाने के लिए सभी पार्टियां अपने-अपने तरीके से चाल चल रही हैं। आने वाले समय में कांग्रेस भी पूर्व सैनिकों के वोटों को साधने के लिए दांव चल सकती है। 

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भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल कोठियाल की आहट के चलते पहले ही उत्तराखंड में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट को केंद्र में रक्षा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके साथ ही मंत्री अजय भट्ट भी पूर्व सैनिकों से बातचीत आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। मंत्री बनने के बाद से वह लगातार पूर्व सैनिकों के संपर्क में नजर आ रहे हैं। सोमवार को निकाली गई जन आशीर्वाद यात्रा में भी कई पूर्व सैनिक शामिल हुए।

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दून में यात्रा के दौरान रक्षा राज्यमंत्री पूर्व फौजी अफसरों के रात्रिभोज में शामिल हुए। भाजपा के हलकों में इस डिनर डिप्लोमेसी की चर्चा रही। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी इस भोज के सूत्रधार बने। सियासी जानकारों का मानना है कि सेना, सैनिक व पूर्व फौजी भाजपा का सबसे बड़ा फोकस है। यही वजह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराखंड दौरे में पूर्व सैनिकों का एक अलग कार्यक्रम रखा गया है।   

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अब आम आदमी पार्टी ने कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल पर दांव खेलकर सैन्य बहुल उत्तराखंड में फौजी वोट बैंक पर सेंध लगाने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर खलबली मचा दी। सियासी पंडितों का कहना है कि कांग्रेस भी बहुत जल्द पूर्व फौजियों को रिझाने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है। 

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ढाई लाख से ज्यादा हैं पूर्व सैनिक, औसतन उनके परिवार में पांच वोटर

प्रदेश में पूर्व सैनिकों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है। माना जाता है कि हर पूर्व सैनिक के  परिवार में औसतन पांच वोटर होंगे। इसलिए साढ़े बारह लाख से ज्यादा वोटरों पर सभी की निगाहें हैं। इसके अलावा वर्तमान फौजियों के परिवार भी बड़ी संख्या में उत्तराखंड में रहते हैं। पूर्व फौजी उनके भी मतों पर असर डालते हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनमें पूर्व के साथ ही वर्तमान फौजी भी हैं।

विधानसभा चुनावों में ये वोट कई सीटों पर हार-जीत का फैसला भी करते हैं। पूर्व में भी पार्टियों के बीच इन वोटरों को लेकर खींचतान रही है। भाजपा इन वोटों पर ज्यादा सेंध लगाती है। इस बार भी राजनीतिक पार्टियां इस होड़ में जुट गई हैं।

भाजपा के दो बड़े मुद्दों पर केजरीवाल ने की चोट
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सैनिक और हिंदुत्व के एजेंडों पर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चोट करने का प्रयास किया है। एक ओर जहां उन्होंने हिंदुओं के लिए उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की घोषणा कर हिंदुत्व के एजेंडे पर चोट की है तो दूसरी ओर पूर्व सैनिकों के वोट बैंक को लेकर उन्होंने कर्नल को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया है। 

सैन्य बहुल हमारे प्रदेश में बड़ी संख्या पूर्व सैनिक और उनके परिवार की है। आज भी उनकी कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। हमें मौका मिलेगा तो उनकी समस्याओं के समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता पर किए जाएंगे।
- कर्नल(सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल, आप के सीएम उम्मीदवार

हर पार्टी की अपनी रणनीति होती है। भाजपा की अपनी रणनीति है। सैनिकों और सैन्य परिवारों के लिए भाजपा ने कई कल्याणकारी फैसले लिए। वन रैंक वन पेंशन का मामला भाजपा ने हल किया। भाजपा सर्वस्पर्शी और सर्वमान्य पार्टी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के नारे को चरितार्थ किया है। साफ दिख रहा है कि उत्तराखंड की जनता 2022 में भाजपा को एक बार फिर सेवा का अवसर देने जा रही है।
- अजय भट्ट, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री
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