प्रदेश में पूर्व सैनिकों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है। माना जाता है कि हर पूर्व सैनिक के परिवार में औसतन पांच वोटर होंगे। इसलिए साढ़े बारह लाख से ज्यादा वोटरों पर सभी की निगाहें हैं। इसके अलावा वर्तमान फौजियों के परिवार भी बड़ी संख्या में उत्तराखंड में रहते हैं। पूर्व फौजी उनके भी मतों पर असर डालते हैं। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनमें पूर्व के साथ ही वर्तमान फौजी भी हैं।
विधानसभा चुनावों में ये वोट कई सीटों पर हार-जीत का फैसला भी करते हैं। पूर्व में भी पार्टियों के बीच इन वोटरों को लेकर खींचतान रही है। भाजपा इन वोटों पर ज्यादा सेंध लगाती है। इस बार भी राजनीतिक पार्टियां इस होड़ में जुट गई हैं।
भाजपा के दो बड़े मुद्दों पर केजरीवाल ने की चोट
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सैनिक और हिंदुत्व के एजेंडों पर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चोट करने का प्रयास किया है। एक ओर जहां उन्होंने हिंदुओं के लिए उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की घोषणा कर हिंदुत्व के एजेंडे पर चोट की है तो दूसरी ओर पूर्व सैनिकों के वोट बैंक को लेकर उन्होंने कर्नल को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया है।
सैन्य बहुल हमारे प्रदेश में बड़ी संख्या पूर्व सैनिक और उनके परिवार की है। आज भी उनकी कई समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। हमें मौका मिलेगा तो उनकी समस्याओं के समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता पर किए जाएंगे।
- कर्नल(सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल, आप के सीएम उम्मीदवार
हर पार्टी की अपनी रणनीति होती है। भाजपा की अपनी रणनीति है। सैनिकों और सैन्य परिवारों के लिए भाजपा ने कई कल्याणकारी फैसले लिए। वन रैंक वन पेंशन का मामला भाजपा ने हल किया। भाजपा सर्वस्पर्शी और सर्वमान्य पार्टी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के नारे को चरितार्थ किया है। साफ दिख रहा है कि उत्तराखंड की जनता 2022 में भाजपा को एक बार फिर सेवा का अवसर देने जा रही है।
- अजय भट्ट, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री