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मेरी गिरफ्तारी का तो सवाल ही नहीं उठता, और...गिरफ्तार हो गए मृत्युंजय मिश्रा, पढ़ें कैसे हुआ ये सब

Wed, 05 Dec 2018 08:33 AM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
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डा. मृत्युंजय मिश्रा
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ईसी रोड स्थित कैफे  में बैठे मृत्युंजय मिश्रा शहद वाली ग्रीन टी की चुस्कियों के साथ बड़े गुमान के साथ कह रहे थे कि मेरी गिरफ्तारी का सवाल ही नहीं उठता। उस वक्त शाम के करीब पौने चार बज रहे होंगे। उसी अंदाज में मृत्युंजय आगे बोले, किसी भी मुकदमे में कोई ऐसा सबूत नहीं है...उनकी यह बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अचानक पांच-छह लोगों ने मिश्रा को घेरे में ले लिया।  यह सारा वाकया अमर उजाला रिपोर्टर ने सोमवार को अपनी आंखों से देखा। 

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दरअसल, अमर उजाला के सोमवार के अंक में ‘मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल की एक और जांच शुरू’ खबर प्रकाशित हुई थी। इस खबर पर मिश्रा की आपत्ति थी कि उनके पक्ष को सही ढंग से नहीं रखा गया है, हकीकत बताने के लिए उन्होंने संवाददाता को ईसी रोड स्थित कैफे में बुलाया था।
 

बातचीत चल ही रही थी कि एक साथ कुछ लोग कैफे में दाखिल हुए । अचानक इतने सारे लोगों को अगल-बगल देखकर एक पल को मिश्रा सकपका गए। वह कुछ बोलते, इससे पहले ही घेरा बनाए लोगों में से एक व्यक्ति बोला, चलिये आप।
 
मिश्रा ने खुद को संभालने की कोशिश करते हुए पूछा- कहां? हम विजिलेंस से हैं, आए लोगों में से एक ने जवाब दिया । इतना सुनते ही, मिश्रा का लहजा और तल्ख हो गया। बैठे-बैठे रौबदार लहजे में  सवाल किया- पहचान रहे हो मुझे ?  सामने से सख्त लहजे में शालीन जवाब मिला-जी मिश्रा जी, चलिये आप गाड़ी में तो बैठिए। 

शायद मिश्रा मौके की नजाकत को भांप गए थे, पेशानी पर बल पड़ गया। क्या करें और क्या न करें के हजारों भाव पल भर में चेहरे पर पसर गई। एक गहरी खामोशी माहौल में तैर गई। उसे विजलेंसकर्मी ने तोड़ा, अब चलिए भी कहते हुए उसने बिना जवाब का इंतजार किए, मिश्रा के कमर में हाथ डालते हुए उनको उठा लिया और साथ चलने पर विवश कर दिया।
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मिश्रा ने चाय के भुगतान की मंशा जाहिर की तो विजलेंसकर्मियों ने उसे भी अनसुना कर दिया। मिश्रा का इस  कैफे में अक्सर आना होता था, लिहाजा वहां मौजूद कर्मचारी भी यह नजारा देखकर अवाक रह गए। उनकी समझ नहीं आया कि हो क्या रहा है।

चलते-चलते मिश्रा ने उनसे कहा...हिसाब-किताब बाद में कर लेंगे, जवाब में कर्मचारियों ने हां में सिर हिला दिया। इसके बाद टीम मिश्रा को कैफे से बाहर लेकर आई। सड़क के दूसरी ओर विजिलेंस की गाड़ी खड़ी थी। मिश्रा फिर कुछ बोले, लेकिन विजिलेंसकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। एक कर्मी ने कमर में हाथ अड़ाया और कुछ खीचते हुए सड़क पार कराई, उन्हें गाड़ी में बैठाया और चलते बने।
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