चौथा श्वेत पत्र जारी करते हुए कांग्रेस ने भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर युवाओं से रोजगार छिनने, शिक्षा का बंटाधार करने और महिला अत्याचारों में बढ़ोत्तरी का आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ और रागिनी नायक ने बिंदुवार भाजपा पर तमाम आरोप लगाए हैं।
मंगलवार को राजीव भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के युवाओं से प्रतिवर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आखिर में उन्हें नाले की गैस से पकौड़े तलने की सलाह दे दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में बेरोजगारी दर 7.9 प्रतिशत के पायदान पर पहुंच गई है। अकेले उत्तराखंड में आठ लाख से अधिक बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं। यह सरकारी आंकड़ा है, जबकि असल में राज्य में बेरोजगारी की यह दर दस गुना अधिक है।
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पलायन आयोग की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 52 प्रतिशत युवाओं ने बेरोजगारी के चलते राज्य से पलायन किया है। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन व नोटबंदी के चलते 14 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं। जबकि केंद्र व राज्य सरकारों में 60 लाख से अधिक सरकारी पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षण संस्थानों में ही लाखों पद खाली पड़े हैं। यूनेस्को की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में अकेले 11 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं। शिक्षा सेस के नाम पर इकट्ठा किया गया 108180 करोड़ रुपये कहां गायब हो गए, इसका किसी को पता नहीं है।
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प्रवक्ता रागिनी नायक ने कहा कि मोदी सरकार में विभिन्न संस्थाओं में आरएसएस के लोगों को भरा गया है। वहीं छात्रों पर जुल्म बढ़े हैं। जो उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता है, उसकी आवाज को दबाने का काम किया जाता है। इसके अलावा महिला अत्याचारों में बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं को रोजगार के अवसर कम हुए हैं। जबकि निर्भया फंड को भी राज्यों को नहीं बांटा जा रहा है। इस फंड का 52 प्रतिशत बजट आवंटित ही नहीं किया गया।
मनरेगा के बजट में कटौती, गरीबों के पेट पर लात
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि उत्तराखंड में मनरेगा के 8.39 लाख एक्टिव कार्ड होल्डर्स हैं। राज्य में 2020-21 दौरान मनरेगा का बजट 299 करोड़ का था, जो 2021-22 में घटकर 200 करोड़ का हो गया। अब जब केंद्र सरकार ने देश के मनरेगा का बजट 98 हजार करोड़ से एक चौथाई कम कर 73 हजार करोड़ कर दिया है, तो उत्तराखंड में मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार में और भारी कटौती होगी। उत्तराखंड में 100 दिन के रोजगार गारंटी वाली इस योजना में 2019-20 में प्रति परिवार औसत रोजगार 40.9 दिन था, जो 2021-22 में घटकर 38.13 दिन रह गया है।
घोषणा पत्र को लेकर कसा भाजपा पर तंज
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में अब मात्र पांच दिन शेष रह गए हैं, लेकिन भाजपा का अपना घोषणा पत्र तक नहीं जारी नहीं कर पाई। इससे स्पष्ट हो जाता है कि भाजपा चुनाव पूर्व ही अपनी हार स्वीकार कर चुकी है। उसके पास उत्तराखंड वासियों के सामने कहने के लिए कुछ नया नहीं है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वर्ष 2017 के चुनाव से पूर्व उसने जो घोषणा पत्र जारी किया था, उसमें से एक भी काम पूरा नहीं किया।