सरकार के पेश बजट में व्यय की नई मद बड़े वोट बैंक को साधती हुई दिख रही हैं, लेकिन कई वर्गों को तरजीह नहीं मिली। 15 लाख से अधिक वोट बैंक वाले फौजी वर्ग के लिए सरकार के खजाने से कुछ भी नहीं निकला।
सरकार सैनिक कल्याण में चल रही योजनाओं से संतुष्ट है, जबकि वित्तीय वर्ष 2015-16 के अनुपूरक बजट में विभाग को प्रस्तावित बजट का 10 प्रतिशत ही मिला था, जिसके बाद इस बजट से उम्मीद लगाए पूर्व सैनिकों को निराशा हाथ लगी है।
बजट में सिर्फ सरकार ने 2014 की अर्द्धसैनिक कल्याण निदेशालय की घोषणा की पूर्ती कर फौजियों की बड़ी तादात को किनारे रखा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए सरकार के खजाने से कुछ नहीं निकला। ऐसा ही हाल राज्य आंदोलनकारियों और एसएसबी गुरिल्लाओं का भी है।
वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के बजट भाषण में इसका उल्लेख हुआ कि राज्य की 16 प्रतिशत आबादी पूर्वसैनिक, वीर नारियों, अर्द्धसैनिकों व आश्रितों की है।
उनके आर्थिक व सामाजिक कल्याण के प्रति उन्होंने सरकार की वचनबद्धता तो दोहराई, लेकिन उनके कल्याण के लिए कोई नई घोषणा नहीं की। वित्त मंत्री केवल सैनिक कल्याण महकमे की चल रही योजनाओं से उनके कल्याण को लेकर आश्वस्त दिखी।
अनदेखी झेल चुके महकमे के लिए यह दोहरा आघात:
अनुपूरक बजट में अनदेखी झेल चुके महकमे के लिए यह दोहरा आघात है कि जिन घोषणा को उनकी विभागीय मंत्री हरक सिंह रावत कर चुके हैं उन तक के लिए सरकार बजट प्रावधान नहीं कर पाई है।
इससे यह भी साबित होता है कि सीएम से एक माह पूर्व हुई पूर्वसैनिकों और अर्द्धसैनिकों से हुई चाय पर चर्चा में पूर्वसैनिक अपनी बात नहीं समझा पाए जबकि अर्द्धसैनिकों को दो वर्ष के इंतजार के बाद बजट में अपने अलग निदेशालय का तोहफा मिला है।
सैनिक कल्याण के लिए 36.80 करोड़ का बजट प्रावधान किया। जबकि अर्द्धसैनिक कल्याण के लिए 17 लाख रुपये का प्रावधान कर दिया। इतना ही नहीं अर्द्धसैनिकों के लिए कैंटीन सुविधा भी रखा गया है।
फौजियों से इन वादों को भूली सरकार:
- उल्लेखनीय सेवा पदक धारकों की वार्षिक सम्मान राशि में वृद्धि
- पूर्वसैनिक आवासीय योजना में एक लाख की वृद्धि
- वीर नारी पुत्री विवाह योजना में एक लाख की वृद्धि
- नए सैनिक विश्राम गृहों का निर्माण
- आश्रितों की छात्रवृति योजना में वृद्धि
- पूर्व सैनिकों की राज्य ईको टास्क फोर्स का गठन
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और आंदोलनकारियों के हिस्से कमेटी:
सरकार से नौकरियों में आरक्षण, चिन्हीकरण और पेंशन जैसी मांग कर रहे राज्य आंदोलनकारियों के लिए बजट के पिटारे से कैबिनेट सब कमेटी निकली।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए भी सब कमेटी ही हिस्से में आई है। एसएसबी गुरिल्लाओं के लिए नौकरी से लेकर पेंशन तक के मुद्दे पर कोई निर्णय निकल कर नहीं आया।