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लोगों पर नहीं असर

Sat, 12 Mar 2016 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश
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नदी - फोटो : amar ujala
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जिस मोक्षदायिनी गंगा की अक्षुण्णता, निर्मलता के लिए सख्त रवैया अपनाए हुए है, टिहरी प्रशासन, पुलिस और मुनिकीरेती निकाय प्रशासन उसे उतना ही मैला करने पर तुले हैं। खारास्रोत नदी के मुहाने पर गंगा तट का इस्तेमाल अनधिकृत पार्किंग के तौर पर किया जा रहा है। साथ ही गंगा में लोकल और पर्यटक वाहनों की धुलाई भी की जा रही है। सब कुछ जिम्मेदार लोगों के सामने हो रहा है। लेकिन वह इससे बाखबर होने के बावजूद कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं।
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जिस मोक्षदायिनी गंगा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नदी किनारे संचालित बीच कैंपों पर रोक लगा दी हैै, उसके आदेश की मुनिकीरेती में धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लेकिन इस मामले में जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। नतीजन मुनिकीरेती में खारास्रोत नदी और गंगा के किनारे तक लोकल और पर्यटक वाहनों को उतारा जा रहा है। यहां बाकायदा वाहनों को अनधिकृत रूप से पार्क भी किया जा रहा है।

साथ ही वाहनों को गंगा में उतारकर धुलाई भी की जा रही है। धुलाई से निकली सारी गंदगी गंगा में गिर रही है, जिससे गंगा मैली हो रही है। लेकिन धड़ल्ले से प्रदूषित की जा रही पतित पावनी की रोकथाम करने वाला कोई नहीं। मामला प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका मुनिकीरेती के संज्ञान में है। इसके बावजूद न तो वाहनों को गंगा में उतरने से रोका जा रहा है और न ही यहां पार्क होने और गंगा में धुलाई करने वाले वाहन मालिक-चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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आस्था पथ पर चल रही गंदगी फैलाने की दुकानें
खाद्य सामग्री बेचने वाले कारोबारी भी पतित पावनी को मैला करने में पीछे नहीं हैं। खारास्रोत से लेकर समूचे आस्था पथ पर खाद्य सामग्री की अस्थायी दुकानें धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। इनका अवशेष कचरा, गंदगी यहीं नदी के किनारे छोड़ी जा रही है जो आखिरकार गंगा में गिर रही है। लेकिन जिम्मेदार यहां भी आंखें मूंदे हुए हैं। अधिकारियों के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये से तीर्थक्षेत्र में मोक्षदायिनी का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। 
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