तब से केवल एक और महिला माला राज्य लक्ष्मी शाह 2012 में उस जगह पहुंच पाई, जिसे कभी पुरुषों का एकाधिकार माना जाता था। सात दशकों से अधिक के चुनावों में केवल तीन महिलाएं। टिहरी से माला राज्य लक्ष्मी शाह 2014, 2019 के आम चुनाव में सांसद बनीं। 1952 के चुनावों में टिहरी गढ़वाल सीट पर एक उल्लेखनीय घटना घटी। जब राजमाता कमलेंदु मती शाह ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के समर्थन की जबरदस्त लहर के बावजूद इस चुनाव में कमलेंदु मती शाह की जीत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई। कमलेंदु मती शाह को संविधान सभा के एक प्रमुख सदस्य कांग्रेस उम्मीदवार ठाकुर कृष्ण सिंह से कड़ी टक्कर मिली।
रद्द कर दिया था मानवेंद्र का नामांकन
1952 के चुनावों में महाराजा मानवेंद्र शाह ने भी चुनाव में नामांकन दाखिल किया था। उस समय ऐसी शंकाएं भी हुईं कि उस समय के राजनीतिक दिग्गज गोविंद बल्लभ पंत मानवेंद्र शाह का नामांकन रद्द करवा सकते हैं। इन आशंकाओं का जिक्र महाराजा शाह की आत्मकथा में दर्ज है। दुर्भाग्य से मानवेंद्र शाह का नामांकन वास्तव में रद्द कर दिया गया था, जिससे कमलेंदु मती शाह ठाकुर कृष्ण सिंह की एकमात्र विरोधी बनीं। कमलेंदु मति शाह महाराजा नरेंद्र शाह की पत्नी थीं। 1998 में, एक अन्य महिला इला पंत ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में नैनीताल लोकसभा सीट जीतकर विरासत को जारी रखा। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नारायण दत्त तिवारी को हराकर उत्तराखंड के लोगों की सेवा करने के अपने मजबूत नेतृत्व और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया।