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कैंसर और ट्रॉमा से गुजर रहे मरीजों के इलाज व उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत करने को लेकर रिहैबिलिटेशन सेंटर खोलने का भी प्रस्ताव

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सियाटिका, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, घुटनों, फ्रोजन शोल्डर, न्यूरॉलजिया, टेनिस एल्बो और जानलेवा कैंसर के गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। इनका दर्द दूर करने के लिए अब राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की ओर से दून अस्पताल में पेन क्लीनिक खोला जाएगा। इसके साथ ही कैंसर और मेंटल ट्रॉमा से गुजर रहे मरीजों को मानसिक तौर पर मजबूत करने के लिए अस्पताल में रिहैबिलिटेशन सेंटर खोलने की भी तैयारी है।
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दून अस्पताल में पेन क्लीनिक की व्यवस्था नहीं होने से गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों को निजात मिल पाती है। दवाओं का असर भी जब दर्द कम करने में नाकाम साबित हो जाता है तो पेन स्पेशलिस्ट की मदद से पेन क्लीनिक में ऐसे मरीजों को इलाज करके राहत दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी दर्द यदि तीन महीने से अधिक समय तक लगातार बना रहता है और दवाइयों से भी ठीक नहीं होता है तो ऐसे मरीजों को पेन क्लीनिकों में पेन स्पेशलिस्ट की मदद से इलाज करने की बात कही गई है। इसमें इलाज की विशेष तकनीक का इस्तेमाल कर मरीजों को दर्द से राहत दी जाती है।
अब राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पेन क्लीनिक खोलने की तैयारी है। प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि दून अस्पताल में पेन क्लीनिक के साथ ही रिहैबिलिटेशन सेंटर खोलने के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। अस्पताल में जल्द ही पेन क्लीनिक और रिहैबिलिटेशन सेंटर खोलकर मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा।
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अभी निजी अस्पतालों की लगानी पड़ती है दौड़
राजधानी के किसी भी सरकारी अस्पताल में पेन क्लीनिक और रिहैबिलिटेशन सेंटर की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और तीमारदारों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। वहां इलाज कराना उनकी जेब पर भारी साबित होता है। ऐसे में दून अस्पताल में पेन क्लीनिक और रिहैबिलिटेशन सेंटर खुलने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
नए सिरे से शुरू की गई प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में नए सिरे से प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से इस संबंध में तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि कॉलेज में प्रोफेसर, एसोसिएट, असिस्टेंट प्रोफेसरों की कमी है। इसके चलते छात्रों की पढ़ाई के साथ ही दून अस्पताल में मरीजों के इलाज में भी परेशानी होती है। छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के साथ ही दून अस्पताल में मरीजों का इलाज ढंग से किया जा सके, इसके लिए नए सिरे से प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। बता दें कि दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से भर्ती की प्रक्रिया कई बार शुरू की गई, लेकिन हर बार बेहद कम संख्या में प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर साक्षात्कार के लिए पहुंचे। इसी के चलते भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है।
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