अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाणपत्र पर अब वैधता अवधि भी दर्ज की जाएगी। इस संबंध में उत्तराखंड अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष डॉ. कल्पना सैनी ने आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए दून निवासी मो. आशिक की ओर से आयोग में शिकायत की गई थी।
मो. आशिक ने बताया कि पिछड़े वर्ग के जाति प्रमाणपत्र की वैधता तीन साल की होती है, लेकिन प्रमाणपत्र पर वैधता अवधि की तिथि दर्ज नहीं की जाती। इसके चलते प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त होने के बाद अभ्यर्थी को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती और वह नौकरी, छात्रवृत्ति, शिक्षा आदि के लिए मिलने वाले लाभ के लिए आवेदन नहीं कर पाते। ऐसे में प्रमाणपत्र पर अवधि तिथि दर्ज होने से प्रदेश के हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। संवाद