सख्त भू-कानून की मांग को लेकर विधानसभा कूच करते युवा संगठन के सदस्य। संवाद
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हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भू-कानून लागू करने की मांग को लेकर युवाओं ने विधानसभा कूच कर प्रदर्शन किया। युवाओं ने कहा कि प्रदेश में भू-कानून से पहाड़ी किसान अपनी जमीन का स्वयं मालिक बना रहेगा और देवभूमि की संस्कृति व अस्मिता से भी कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकेगा।
विधानसभा कूच के दौरान रिस्पना पुल से पहले पुलिस के रोके जाने पर युवा भड़क गए। उनकी पुलिस ने जमकर नोकझोंक भी हुई। युवाओं ने चेतावनी दी कि जल्द मांग पूरी नहीं हुई तो वह आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। युवाओं के प्रदर्शन को आंदोलनकारियों और महिलाओं ने भी समर्थन किया। बुधवार को आशीष नौटियाल के नेतृत्व में कई युवा, महिलाएं व राज्य आंदोलनकारी नेहरू कॉलोनी में एकत्र हुए। जहां से भू-कानून लागू करने की मांग और सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए विधानसभा की ओर बढ़े। वहीं, महिलाओं ने कहा कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर विधानसभा कूच करने के लिए सम्मिलित हुई हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बना रही है। इससे युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे उत्तराखंड में पलायन की समस्या बढ़ रही है।
आशीष नौटियाल ने कहा कि 2018 में तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत सरकार ने भू-कानून में बदलाव कर पहाड़ों व मैदानी इलाकों में जमीन की खुली बिक्री की छूट दी। इसे सरकार की ओर से तुरंत वापस लिया जाए। प्रदर्शन करने वालों में लूशुन टोडरिया, सौरभ सेमवाल, आशीष नेगी, प्रज्वल जोशी, मनीष पांडेय, मंजू कोटनाला, इंदु नवानी, नीमा रौथाण, दीपिका नयाल, जगमोहन नेगी, प्रदीप कुकरेती, सुरेश नेगी आदि मौजूद रहे।