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Uttarakhand: प्लास्टिक कचरे को लेकर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को दिए तीन सप्ताह में निपटारा करने के निर्देश

Fri, 08 Jul 2022 05:26 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल

सार

सिंगल यूज प्लास्टिक के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार सहित सभी पक्षकारों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता और विक्रेता खाली प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के रैपर आदि को वापस ले जाना सुनिश्चित करें।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने प्लास्टिक में अपने उत्पाद बेचने वाले उत्पादनकर्ताओं, परिवहनकताओं और विक्रेताओं को दस दिन के भीतर अपना पंजीकरण उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर ये अपना पंजीकरण नहीं कराते हैं तो सरकार उनके उत्पादों की राज्य में बिक्री पर रोक लगाए।

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कोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह के भीतर पूरे प्लास्टिक कचरे का निपटारा कर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार सहित सभी पक्षकारों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष अल्मोड़ा के हवलबाग निवासी जितेंद्र यादव की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जितेंद्र ने याचिका में कहा था कि राज्य सरकार ने 2013 में प्लास्टिक के प्रयोग और उसके निपटारे के लिए नियमावली बनाई थी। उन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
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2018 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए थे जिसमें उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता और विक्रेताओं को जिम्मेदारी दी थी कि वह जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक वापस ले जाएंगे। अगर नहीं ले जाते हैं तो संबंधित नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों को फंड देंगे, जिससे कि वे इसका निस्तारण कर सकें। उत्तराखंड में इसका भी उल्लंघन किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हुए हैं और इसका निपटान भी नहीं किया जा रहा है। 

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कोर्ट ने कहा कि उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता और विक्रेता खाली प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के रैपर आदि को वापस ले जाना सुनिश्चित करें। अगर वापस नहीं ले जाते हैं तो उसके बदले नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायतों  और अन्य को फंड दें जिससे कि वह इसका निस्तारण कर सकें। कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से इसकी निगरानी करने के लिए कहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से प्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में प्रचार-प्रसार करने के लिए भी कहा है।

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