नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा एक साल की चार संधियां हैं, जिनमें से मार्च व सितंबर में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं।
अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करें
इस समय स्वस्थ रहने के लिए और शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णतया स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम नवरात्र है। इस बार शारदीय नवरात्र नौ दिन के बजाए आठ दिन के होंगे। इस बार तिथियों के घटने और बढ़ने से नवरात्र के दिन कम हो गए हैं।
घट स्थापना का सर्वोत्कृष्ट मुहूर्त पूर्वाह्न 11.52 से दोपहर 12.38 बजे तक है। पंडित उदय शंकर भट्ट ने बताया कि कलश स्थापना या घट स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा प्रारंभ होती है। सात अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करें। यह सर्वोत्तम मुहूर्त है।