बहुचर्चित दारोगा भर्ती घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के ग्यारह साल बाद सीबीआई ने विशेष अदालत में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक पीडी रतूड़ी और पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश मित्तल के खिलाफ बृहस्पतिवार को चार्जशीट दाखिल की है।
आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने की नीयत से फाइनल लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया।
प्रदेश में 2002-03 में सिविल पुलिस, पीएसी और इंटेलिजेंस के 253 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा हुई थी। बाद में आरोप लगे कि लिखित परीक्षा के अंकों में फेरबदल कर अपात्र चहेते अभ्यर्थियों के अंकों को बढ़ा दिया गया और पात्र अभ्यर्थियों के अंकों को कम कर दिया गया।
मामले का खुलासा होने पर आठ दिसंबर, 2003 को अंडर सेक्रेट्री ओपी तिवारी ने दोनो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
विशेष जज (सीबीआई) अमित कुमार सिरोही की अदालत में चार्जशीट दाखिल करने के दौरान लोक अभियोजन अधिकारी सीबीआई पंकज गुप्ता ने आरोप पत्र पर बहस की।
ऐसे हुआ था पूरा फर्जीवाड़ा
रिजल्ट बनाने के लिए तय संस्था आईआईटी रुड़की ने लिखित परीक्षा के अंकों की फ्लॉपी डीआईजी एबी लाल को सौंपी थी। डीजी के निर्देश पर इंटरव्यू कमेटी के हेड बनाए गए एडीजीपी राकेश मित्तल को यह फ्लॉपी दिलाई गई।
फ्लॉपी मिलने के बाद एडीजीपी मित्तल ने अपने लैपटॉप पर यह लिस्ट कॉपी की और इस रिकार्ड से कुछ अभ्यर्थियों के अंकों में फेरबदल कर दूसरी सूची तैयार कर ली। आईआईटी रुड़की की और से उपलब्ध कराई गई फ्लॉपी और अन्य रिकार्ड को चयन समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया।
इन धाराओं में दाखिल की चार्जशीट
सीबीआई ने 120 बी षड़यंत्र, 420 धोखाधड़ी, 467 कूट रचना, 468 कूट रचना कर अभिलेख तैयार करना, 471 कूट रचित दस्तावेज, 13 (2) सहपठित 13 आई (डी) पीसी एक्ट भ्रष्टाचार अधिनियम में आरोपी पत्र दाखिल किया है।
इनका है कहना
इन धाराओं में आरोप साबित हुए तो आरोपियों को सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
-चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता