सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में बेचा जा रहा है घटिया चावल।अमर उजाला
सरकारी गल्ले की दुकानों में गोदामों से घटिया किस्म गेहूं, चावल और चीनी भेजी जा रही है। कई दुकानों पर चावल ऐसा भेजा जा रहा है, जो खाने योग्य नहीं है। गेेहूं भी बारीक और काला पड़ गया है, तो चीनी भी गीली है। घटिया राशन को लेकर दुकानदार शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।
सरकार की ओर से आम लोगों को सस्ते गल्ले की दुकानों में फ्री और सस्से दामों में राशन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन जो राशन लोगों को दिया जाता है, उसकी गुणवत्ता हमेशा से सवालों के घेरे में रहती है। वहीं, अगस्त महीने में जो राशन लोगों को दिया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता तो इतनी घटिया बताई जा रही है कि कई लोगों ने राशन लेने से ही मना कर दिया। कई दुकानों में चावल तो ऐसे हैं कि वह खाने योग्य नहीं है। कई दुकानों में गेहूं भी बारीक और सड़ा हुआ कूड़े वाला बेचा जा रहा है। चीनी की हालत और खराब है। चीनी इतनी गीली है कि उससे पानी टपक रहा है। घटिया राशन के चक्कर में राशन विक्रेताओं और उपभोक्ताओं में तू-तू मैं मैं हो रही है।
राशन विक्रेताओं का कहना है कि जब गोदाम से ही उन्हें ऐसा राशन मिल रहा है तो वह क्या करें। राशन विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनकी दुकान में जो चावल आया है, वह खाने योग्य नहीं है। गेहूं की क्वालिटी भी घटिया है। चीनी भी गीली है। कहा कि डीएसओ से भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
हाल ही में उन्होंने गोदाम का निरीक्षण किया था। जहां राशन की गुुणवत्ता में कोई कमी नहीं पाई गई। अगर किसी दुकान में इस प्रकार की शिकायत आ रही है, तो इसकी जांच की जाएगी। ऐसे दुकानों का राशन वापस कर उन्हें दोबारा से गुणवत्ता युक्त राशन दिया जाएगा।
- बंशी लाल राणा, आरएफसी