निर्मला बिष्ट ने कहा कि उस दौरान महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन पर हमारा अधिकार होगा, शराब बंद होगी आदि कई सपनों को लेकर आंदोलनकारियों ने अलग राज्य की मांग की। खासकर महिलाओं के इस संघर्ष की बदौलत राज्य तो मिला, लेकिन शहीदों और आंदोलनकारियों के सपने आज भी अधूरे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे बड़ी हैरानी की बात क्या होगी कि राज्य गठन के 20 साल बाद भी उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पाया है। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेेती और राज्य आंदोलनकारी मंच के महासचिव रामलाल खंडूरी बताते हैं कि प्रदेश में नौकरियों के नाम पर युवाओं को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से रखा जा रहा है। जबकि मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को आज तक सजा नहीं मिल पायी है।
राज्य आंदोलनकारी और शहीदों के परिजन मुजफ्फरनगर कांड के वर्षों बाद भी न्याय की आस लगाए हैं। लॉयर्स फोरम के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रमन शाह के मुताबिक मुजफ्फरनगर कांड से जुड़े मामले की सुनवाई मुफ्फरनगर और लखनऊ न्यायालय में विचाराधीन है। हमें उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा। यह उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मामला है। महिलाओं और शहीद परिजनों को न्याय मिलेगा।