प्रमुख राज्य आंदोलनकारी और राज्य की मांग पर विधानसभा में पर्चे फेंकने वाले मोहन पाठक का कहना है कि वह इन दिनों पर्वतीय क्षेत्र के अस्पतालों की बदहाल स्थिति का जायजा ले रहे हैं। बाड़ेछीना के नजदीक पहुंचे मोहन पाठक ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र में अस्पताल खंडहर बने हुए हैं। इनमें कोई सुविधा नहीं है। शिक्षा, रोजगार के लिए लगातार पलायन हो रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और अपराधों पर लगाम नहीं लग पाई है। पानी, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं हैं। राज्य का भू-कानून नहीं बन पाया है। शहीदों के सपनों को कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने तार-तार किया है। राज्य आंदोलनकारी हुकुम सिंह कुंवर कहते हैं कि शहीदों के सपनों की स्थायी राजधानी गैरसैंण सपना ही बनकर रह गई है।
बेरोजगारी चरम पर है। शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते पहाड़ के लोग पलायन को मजबूर हैं। पहाड़ खाली हो गए हैं। खेत बंजर हैं, आबादी क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक है। पहले दिल्ली, मुंबई के लिए पलायन होता था आज दिल्ली, मुंबई के साथ ही राज्य के भीतर देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की ओर लोग पलायन कर रहे हैं। पर्वतीय राज्य की आवधारणा खोखली साबित हुई है। मुजफ्फरनगर कांड को सरकारों ने भुला दिया है। पहाड़ों की दिनपर दिन दुर्दशा होती जा रही है।