उत्तराखंड के नेताओं की ओर से किसी एक नाम पर सहमति न बनने की स्थिति में किसी बाहरी को राज्यसभा की उम्मीदवारी सौंपी जा सकती है।
राज्य केनेता इस बात केलिए कमर कसे हैं कि उम्मीदवार बाहर का न हो। जबकि दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदंबरम और पूर्व सांसद राजबब्बर का नाम भी चल रहा है।
उत्तराखंड कांग्रेस में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन की राजनीति नई नहीं है। दावेदार उसी को आधार बनाकर अपना गणित बैठा रहे हैं। बुधवार को गरदपुर से जुड़ी नेत्री शिल्पी अरोड़ा ने भी राज्यसभा की उम्मीदवारी का दावा पेश कर दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से अपनी उम्मीदवारी पेश कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से समय मांगा है।