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Omicron in Uttarakhand: नई एसओपी जारी, सामाजिक दूरी फिर बनी जरूरी, कड़ाई से नियमों का पालन करने के निर्देश

Sun, 26 Dec 2021 01:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधूू की ओर से जारी नई एसओपी में कहा गया है कि कोविड-19 के का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर की है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रदेश में कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे से निपटने के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश में राज्य सरकार की ओर से नई एसओपी जारी की गई है। इसके तहत राज्य में सामाजिक दूरी के साथ तमाम नियमों का सख्ती के साथ पालन करने को कहा गया है। 

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ओमिक्रॉन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर की
मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधूू की ओर से जारी नई एसओपी में कहा गया है कि कोविड-19 के का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जाहिर की है। यह बहुत तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। देशभर में ओमिक्रॉन के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों को अलर्ट किया जाता है कि वह कोविड गाइड लाइन का सख्ती के साथ पालन कराएं।

बचाव के लिए प्रत्येक जिले में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। इसके साथ ही नियमों का पालन न करने वाले लोगों के साथ सख्ती से निपटा जाए। इसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई किए जाने का भी प्राविधान है, जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाए। 
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एसओपी में सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य रूप से मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का पालन करने, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने, गुटखा, तंबाकू इत्यादि का इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, गर्भवती और स्तनपाल कराने वाली महिलाओं और दस वर्ष से कम आयु के बच्चों को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

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ओमिक्रॉन को लेकर स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट  

उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में कोरोना के ओमिक्रॉन व डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण बढ़ने के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए जहां तमाम सरकारी और निजी अस्पतालों में चार हजार ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था कर ली गई है। वहीं स्वास्थ्य महानिदेशालय के निर्देश पर जिला अस्पताल के अलावा सभी उपजिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अगले तीन माह के लिए दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि अब जबकि एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है और डेल्टा वैरिएंट के साथ ओमिक्रॉन भी लोगों को संक्रमित कर रहा है तो इसके मद्देनजर तमाम एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए पूरे जिले में चार हजार ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था कर ली गई है।

सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि सभी ऑक्सीजनयुक्त बेड में लगाए गए तमाम उपकरणों को संचालित करके उन्हें जांच लिया गया है। यह सुनिश्चित कराया जा रहा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त हो रही है या नहीं। इतना ही नहीं अस्पतालों में तमाम वेंटिलेटर, कंसंट्रेटर, गैस सिलिंडर के साथ मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले तमाम उपकरणों की व्यवस्था कर ली गई है।

सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि अस्पतालों में दवा की कमी न हो इसके लिए तीन महीने का स्टाफ सुनिश्चित कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ डाॅक्टरों, पैरामेडिकल और स्टाफ नर्स की कमी न हो इसे लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती का अनुरोध किया गया है।
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समय पर नहीं भेजे जा रहे सैंपल, जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने में हो रही देरी 

देहरादून जिले से कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर न भेजे जाने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इससे तेजी से फैलने वाले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन संक्रमण का पता भी समय पर नहीं लग पा रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले सैंपल दिल्ली, चंडीगढ़ आदि बड़े शहरों में स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे जाते थे। जिससे कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट का पता चल पाता था।

करीब एक महीने पूर्व राजकीय दून मेडिकल कॉलेज पटेलनगर की वायरोलॉजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू कर दी गई। उत्तराखंड में अभी सिर्फ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की लैब में ही जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा है। ऐसे में सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को कोरोना सैंपल यहां भेजने के निर्देश दिए गए थे। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल कम आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी सैंपल में कोरोना वैरिएंट जांचने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह दिन तक लग जाते हैं। दूसरा लैब में जिस मशीन से इसकी जांच की जाती है, उसमें एक बार में अधिकतम 20, 80 और 120 के सांचे होते हैं। 20, 80 और 120 सैंपल आने पर ही उनकी जांच किए जाने की फिलहाल व्यवस्था है। दरअसल, अगर एक बार में इससे कम सैंपल जांचने में इस पर खर्चा अधिक आता है।

ऐसे में सैंपल कम आने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इनमें से कुछ ऐसे कोरोना संक्रमितों के सैंपल भी हैं, जो विदेश से आए हैं या फिर ओमिक्रॉन संक्रमितों के संपर्क में आए हैं। इन स्थितियों में रिपोर्ट देरी से आने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ने की संभावना ज्यादा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं कि कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर यहां भेजें। ताकि जीनोम सिक्वेंसिंग की प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जा सके।
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