उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में कोरोना के ओमिक्रॉन व डेल्टा वैरिएंट का संक्रमण बढ़ने के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए जहां तमाम सरकारी और निजी अस्पतालों में चार हजार ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था कर ली गई है। वहीं स्वास्थ्य महानिदेशालय के निर्देश पर जिला अस्पताल के अलावा सभी उपजिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अगले तीन माह के लिए दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि अब जबकि एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है और डेल्टा वैरिएंट के साथ ओमिक्रॉन भी लोगों को संक्रमित कर रहा है तो इसके मद्देनजर तमाम एहतियाती कदम उठा लिए गए हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो इसके लिए पूरे जिले में चार हजार ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था कर ली गई है।
सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि सभी ऑक्सीजनयुक्त बेड में लगाए गए तमाम उपकरणों को संचालित करके उन्हें जांच लिया गया है। यह सुनिश्चित कराया जा रहा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त हो रही है या नहीं। इतना ही नहीं अस्पतालों में तमाम वेंटिलेटर, कंसंट्रेटर, गैस सिलिंडर के साथ मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले तमाम उपकरणों की व्यवस्था कर ली गई है।
सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि अस्पतालों में दवा की कमी न हो इसके लिए तीन महीने का स्टाफ सुनिश्चित कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ डाॅक्टरों, पैरामेडिकल और स्टाफ नर्स की कमी न हो इसे लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती का अनुरोध किया गया है।
देहरादून जिले से कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर न भेजे जाने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इससे तेजी से फैलने वाले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन संक्रमण का पता भी समय पर नहीं लग पा रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले सैंपल दिल्ली, चंडीगढ़ आदि बड़े शहरों में स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे जाते थे। जिससे कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट का पता चल पाता था।
करीब एक महीने पूर्व राजकीय दून मेडिकल कॉलेज पटेलनगर की वायरोलॉजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू कर दी गई। उत्तराखंड में अभी सिर्फ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की लैब में ही जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा है। ऐसे में सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को कोरोना सैंपल यहां भेजने के निर्देश दिए गए थे। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल कम आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी सैंपल में कोरोना वैरिएंट जांचने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह दिन तक लग जाते हैं। दूसरा लैब में जिस मशीन से इसकी जांच की जाती है, उसमें एक बार में अधिकतम 20, 80 और 120 के सांचे होते हैं। 20, 80 और 120 सैंपल आने पर ही उनकी जांच किए जाने की फिलहाल व्यवस्था है। दरअसल, अगर एक बार में इससे कम सैंपल जांचने में इस पर खर्चा अधिक आता है।
ऐसे में सैंपल कम आने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इनमें से कुछ ऐसे कोरोना संक्रमितों के सैंपल भी हैं, जो विदेश से आए हैं या फिर ओमिक्रॉन संक्रमितों के संपर्क में आए हैं। इन स्थितियों में रिपोर्ट देरी से आने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ने की संभावना ज्यादा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं कि कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर यहां भेजें। ताकि जीनोम सिक्वेंसिंग की प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जा सके।