हाल ही में बेटियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष करने पर आभार जताने के लिए होटल में विभिन्न संस्थाओं से जुड़ी बेटियां, महिलाएं जुटी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित हाथ से पत्र लिखकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपे। रविवार को बैठक खत्म होने के बाद बेटियों ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्होंने उनके माध्यम से पीएम मोदी का आभार जताया। कहा कि बेटियों को शादी की उम्र में लड़कों के बराबर का अधिकार दिया गया है, जो निश्चित तौर पर उनके सशक्तीकरण में कारगर कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस कदम से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के मिशन को यथार्थ कर दिखाया है। अभी तक 18 साल की उम्र ओने तक बेटियों शिक्षित हो हो जाती थी लेकिन उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाती थी या फिर कैरियर नहीं बना पाती थी। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी शादी के लिए 21 साल की उम्र उचित बताई जाती है। लिहाजा, उन्होंने इस महिलाओं की आजादी की दिशा में अहम कदम बताया। इस मौके पर भाजपा नेता दीप्ति रावत समेत अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
लंबे समय से दूर निशंक हुए राजनीति में सक्रिय
अस्वस्थ होने की वजह से लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति से दूर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक रविवार को अचानक सक्रिय हो गए। वह दिनभर पार्टी के कार्यक्रम में शामिल रहे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक अस्वस्थ होने के कारण लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति से दूर थे। वह पार्टी के कई कार्यक्रमों में भी इस दौरान नहीं आ पाए थे। रविवार को वह शुरू से ही पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यक्रम में साथ खड़े नजर आए। वह सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों से अपने पुराने अंदाज में मिले। उत्तराखंड की राजनीति में निशंक का अपना एक कद, पहचान है। इस लिहाज से माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी भी निशंक के अनुभवों का लाभ लेना चाहती है।
आगामी चुनाव में अहम होगी निशंक की भूमिका
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए अहम साबित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलती हैं तो ऐसे नाजुक वक्त में निशंक बड़े खेवनहार बनकर उभर सकते हैं। हालांकि यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि निशंक कितने कारगर होंगे।
सी-डी और संवेदनशील बूथों के लिए बनेगी अलग रणनीति
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को हुई बैठकों में एक बार फिर बूथों के श्रेणीकरण पर चर्चा की। उन्होंने सी और डी श्रेणी के बूथों के साथ ही संवेदनशील बूथों के लिए अलग रणनीति बनाने पर जोर दिया। दरअसल, भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश के सभी बूथों को चार श्रेणियों में बांटा है। पहली ए श्रेणी ऐसी है, जहां भाजपा पूरी तरह से मजबूत है। दूसरी बी श्रेणी ऐसी है, जहां भाजपा अपेक्षाकृत कम मजबूत है।
तीसरी सी श्रेणी ऐसी है, जहां भाजपा 50 प्रतिशत और चौथी डी श्रेणी ऐसी है, जहां भाजपा बिल्कुल कमजोर है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि तीसरी सी और चौथी डी श्रेणी के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। इन बूथों की बूथ इकाई से लेकर पन्ना प्रमुख ही नहीं बल्कि प्रभारियों को भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। सूत्रों के मुताबिक, समुदाय विशेष से जुड़े संवेदनशील बूथों को भी भाजपा ने विशेष संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। इन बूथों तक अपनी पकड़ बनाने के लिए पार्टी अलग रणनीति बनाएगी।
समीक्षा बैठक में नहीं हुई प्रत्याशियों पर चर्चा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा देहरादून पहुंचे तो माना जा रहा था कि वह समीक्षा बैठक में प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने शाम को सीएम, प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री संगठन से अलग-अलग बैठक की, जिसमें माना जा रहा है कि उन्होंने प्रत्याशियों पर चर्चा की होगी।रविवार को राजपुर रोड स्थित होटल में हुई बैठक में माना जा रहा था कि नड्डा आगामी विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों पर भी चर्चा करेंगे। करीब चार घंटे तक बैठक हुई लेकिन उसमें उनका फोकस प्रत्याशियों के बजाए संगठन की पकड़ मजबूत करने पर दिखाई दिया। सूत्रों के मुताबिक, शाम को उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विधायक, मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लिया। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक से संगठन और महामंत्री संगठन से प्रचारकों के बारे में फीडबैक लिया। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी कहीं से भी पुष्टि नहीं हो पाई।