बजट का बहाना बनाकर उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप का तीन साल बाद मिल रहा मौका भी गंवा दिया गया।
नंदा देवी राजजात की कहानी इस बार भी दोहराई गई। फर्क इतना ही है कि नंदा देवी राज जात में गाड़ी मुख्यमंत्री हरीश रावत के हस्तक्षेप के बाद पटरी पर आ गई थी, जबकि औली में स्कीइंग चैंपियनशिप के पटरी पर आने की उम्मीदें क्षीण हो गई हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत देना चाहते थे सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश
रोचक बात यह है कि चैंपियनशिप को सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देने के लिए बड़े अवसर के रूप में प्रचारित किया जा रहा था। चैंपियनशिप रद्द होने की खबर तब आई जब केदारघाटी में आई आपदा के बाद प्रदेश से रूठे सैलानियों को रिझाने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश लेकर हर राज्य में जाने की योजना बना रहे हैं।
खुद रावत कह रहे हैं कि आला अफसरों को भी इसके लिए दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा। दूसरी ओर इसी माह प्रदेश में जुट रहे देश-विदेश के खिलाड़ियों के आयोजन के बजट पर कैंची चला दी गई। वैसे इस खेल के आयोजन का जिम्मा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के पास था।
निम ने कुछ समय पहले ही शासन को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाकर भी दे दी थी। उस समय इस पर सहमति जता दी गई। निम सूत्रों के मुताबिक इस आयोजन को बड़े स्तर पर करने के लिए निम ने भी तैयारी शुरू कर दी थी।
निम की कोशिश इस आयोजन का उपयोग देश और विदेश का ध्यान उत्तराखंड की ओर खींचने की था। इसके लिए स्नो ब्लोवर मशीन को ठीक किया जाना था। औली के स्लोप की अंतरराष्ट्रीय रेटिंग कराई जानी थी। खिलाड़ियों और अन्य लोगों के रहने, खाने का इंतजाम किया जाना था। प्रदेश में निम ही है जो स्कीइंग का प्रशिक्षण दे रहा है।
चार धाम यात्रा इस बार अप्रैल से होनी है। अप्रैल से ठीक पहले का एक बड़ा आयोजन प्रदेश के पर्यटन के लिए लाइफ लाइन साबित हो सकता था। निम ने एक करोड़ का बजट इसके लिए रखा था। पर शासन ने इसके लिए केवल 40 लाख रुपये ही स्वीकृत किए।
ठीक इसी तरह का वाकया नंदा देवी राजजात के दौरान भी हुआ था। राजजात का जिम्मा संभाल रहे पर्यटन विभाग ने वन विभाग को वेदनी से लेकर जोरा गली तक का रूट तैयार करने का जिम्मा दे दिया था। बजट के अभाव में निम ने हाथ खड़े कर दिए थे और यह साफ हो गया था कि लाखों यात्रियों को खतरनाक ट्रैक पर जाना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद निम को बाद में बजट भी दिया गया और रास्ता बनाने का अधिकार भी। राजजात यात्रा से कुछ दिन पहले ही निम ने इस रास्ते का निर्माण किया था।
मैं दिल्ली में हूं। मेरे संज्ञान में मामला नहीं है। अगर कोई तकनीकी अड़चन है तो दूर की जाएगी। लौट कर आने पर मामले को दिखाऊंगा।
- दिनेश धनै, पर्यटन मंत्री
इस काम को भी हम बेहतर तरीके से करते। मुख्यमंत्री का कहना था कि सुरक्षित राज्य का संदेश जाना चाहिए। आयोजन के पीछे भावना भी यही थी।
- कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान