उत्तराखंड में वन भूमि हस्तांतरण मामले से जुड़ी जिन सात सड़कों को क्षेत्रीय सक्षम समिति (आरईसी) ने सहमति दी थी, उन्हें केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सैद्धांतिक तौर पर मंजूर कर लिया है। लिखित मंजूरी मिलते ही इन मार्गों का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा।
हाल ही में आरईसी की पहली बैठक में लंबे समय से लटकी हुई प्रदेश की सात बड़ी सड़क परियोजनाओं पर सहमति बनी थी। ये सभी परियोजनाएं पांच हेक्टेअर से अधिक वन भूमि की हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने 40 हेक्टेअर वन भूमि तक की परियोजनाओं की मंजूरी का अधिकार मंत्रालय के दून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय को दिया था।
कार्यालय के नोडल अधिकारी और अपर प्रमुख वन संरक्षक एसपीएस लेप्चा के अनुसार केंद्र की सैद्धांतिक सहमति के बाद अब दून कार्यालय से लिखित मंजूरी दी जानी है। बताया कि एक माह के भीतर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद निर्माण शुरू हो सकेगा।
इन मार्गों पर सहमति
-टिहरी जिले में 23.40 किलोमीटर लंबा टिहरी गढ़वाल-थत्यूड-कैंपटी मार्ग, इसमें वन भूमि 12.077 हेक्टेअर है, जिसका निर्र्माण लोनिवि को करना है
-टिहरी में ही झिंझनीसैंण-जखेड़ 10.30 किमी लंबे मोटरमार्ग लोनिवि को बनाना है, इसमें 6.412 हेक्टेअर वन भूमि है
-टिहरी जिले में टिहरी-शिवपुरी-हाडीसेरा मोटरमार्ग दस किलोमीटर लंबा है, जिसमें 5.65 हेक्टेअर वन भूमि आनी है, इसका निर्माण लोनिवि को करना है
-पौड़ी जिले में पौड़ी-पाणीसैंण-डबराड़-बूथानगर मोटरमार्ग (लोनिवि) की लंबाई 12 किलोमीटर है और इसमें 6.93 हेक्टेअर वन भूमि है
-अल्मोड़ा में अल्मोड़ा-क्वारब-कोसी तक 19 किलोमीटर बाईपास मोटर मार्ग (लोनिवि) में 10.1763 हेक्टेअर वन भूमि है
-चमोली में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के अंतर्गत गोल-मथकोट मोटरमार्ग पर 6.65 हेक्टेअर वन भूमि है, जिसकी कुल लंबाई 15.95 है, इसे ग्रामीण अभियंत्रण सेवा को बनाना है
-रुद्रप्रयाग में सेरा-खरगेड़-बासी-कोटला-रोठिया-जवाड़ी-उत्यासू-मल्यासू 14.20 किलोमीटर लंबा मार्ग है, लोनिवि के अधीन इस सड़क पर 8.908 हेक्टेअर वन भूमि है।